कोच्चि , जुलाई 11 -- आईसीएआर-केंद्रीय समुद्री मात्स्यिकी अनुसंधान संस्थान (सीएमएफआरआई) ने चेतावनी दी है कि संभावित अल नीनो के कारण समुद्री तापप्रलय उत्पन्न हो सकता है, जिससे भारतीय तेल सार्डिन के भंडार में भारी गिरावट आने के साथ्क ही 2027 में समुद्री मछली के उत्पादन में बड़ी कमी आ सकती है।
राष्ट्रीय मत्स्य किसान दिवस के संबंध में आयोजित 'वैज्ञानिक-किसान संवाद' कार्यक्रम का उद्घाटन करने के बाद बोलते हुए, सीएमएफआरआई के निदेशक डॉ. ग्रिनसन जॉर्ज ने कहा कि अल नीनो से जुड़ी गर्मी इस साल अक्टूबर-दिसंबर के दौरान तेज होने की उम्मीद है। इसका असर अप्रैल-मई 2027 तक उत्तरी हिंद महासागर में महसूस होने की संभावना है।
डॉ. जार्ज ने कहा कि हालांकि इस साल भारतीय तेल सार्डिन का भंडार प्रचुर मात्रा में है, लेकिन अगर अनुमान के मुताबिक समुद्र गर्म होता है, तो अगले साल इस पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ने की संभावना है। छोटी पेलाजिक मछलियां, विशेष रूप से तेल सार्डिन, समुद्री लू और समुद्र के बढ़ते तापमान के प्रति सबसे संवेदनशील समुद्री प्रजातियों में से हैं। इससे समग्र समुद्री मछली उत्पादन में गिरावट आ सकती है।
उन्होंने कहा कि उपलब्ध वैज्ञानिक जानकारी अप्रैल और मई 2027 के दौरान समुद्री लू चलने, समुद्र की सतह का तापमान बढ़ने और लवणता में वृद्धि की उच्च संभावना को दर्शाती है। ये ऐसी स्थितियां हैं जो समुद्री पारिस्थितिकी तंत्र को गंभीर रूप से प्रभावित कर सकती हैं। उन्होंने चेतावनी दी कि लंबे समय तक समुद्र के गर्म रहने से मूंगा चट्टान पारिस्थितिकी तंत्र को नुकसान पहुंच सकता है। इससे रेड स्नैपर जैसी चट्टानों से जुड़ी प्रजातियों की प्राकृतिक प्रचुरता कम हो सकती है।
मछली पालन और जलीय कृषि क्षेत्रों को अनुमानित जलवायु परिवर्तनों के लिए तैयार होने में मदद करने के लिए, डॉ. जॉर्ज ने घोषणा की कि सीएमएफआरआई इस साल के अंत में मछुआरों और मछली किसानों के लिए अल नीनो से जुड़ी सलाह जारी करेगा।
डॉ. जार्ज ने यह भी आगाह किया कि लंबे समय तक उच्च तापमान और लवणता के बाद अचानक होने वाली बारिश से लवणता में तेजी से उतार-चढ़ाव आ सकता है। इससे तटीय जलीय कृषि गतिविधियों में व्यवधान आ सकता है। समुद्र की स्थितियों की निरंतर निगरानी की आवश्यकता पर बल देते हुए उन्होंने जलवायु-प्रेरित परिवर्तनों के समुद्री संसाधनों पर पड़ने वाले प्रभाव को कम करने और मछुआरों तथा तटीय मछली किसानों की आजीविका की रक्षा के लिए अनुकूलन प्रबंधन रणनीतियों का आह्वान किया।
सीएमएफआरआई के वैज्ञानिकों ने तटीय मछली पालन, पिंजरा मछली पालन, समुद्री मछली बीज उत्पादन, चारा तैयार करने पर तकनीकी मार्गदर्शन प्रदान किया और मछली किसानों के लिए उपलब्ध सरकारी योजनाओं तथा सब्सिडी के बारे में जागरूकता पैदा की।
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