बैतूल , जुलाई 24 -- मध्यप्रदेश के बैतूल स्थित कृषि विज्ञान केंद्र (केवीके) में खरीफ मौसम में कीट एवं रोगों के बढ़ते प्रकोप, अल नीनो के संभावित प्रभाव तथा उनके वैज्ञानिक प्रबंधन को लेकर चार दिवसीय संस्थागत प्रशिक्षण का आयोजन किया गया। प्रशिक्षण में जिले के सभी 10 विकासखंडों के 68 कृषि विकास अधिकारियों ने भाग लिया।
21 से 24 जुलाई तक आयोजित प्रशिक्षण का उद्देश्य कृषि अधिकारियों को नवीनतम कृषि तकनीकों, जलवायु परिवर्तन के प्रभावों तथा फसल प्रबंधन के वैज्ञानिक उपायों से अवगत कराना था, ताकि वे किसानों तक प्रभावी तकनीकी सलाह पहुंचा सकें।
कृषि विज्ञान केंद्र के प्रमुख डॉ. एस.के. तिवारी के मार्गदर्शन में आयोजित प्रशिक्षण के दौरान पौध संरक्षण वैज्ञानिक आर.डी. बारपेटे ने खरीफ फसलों में कीट एवं रोगों के प्रकोप पर अल नीनो के प्रभाव तथा उनके वैज्ञानिक नियंत्रण उपायों की जानकारी दी।
शस्य वैज्ञानिक डॉ. मेघा तिवारी ने अल नीनो की परिस्थितियों में खरपतवार नियंत्रण और पोषक तत्व प्रबंधन की रणनीतियों पर प्रकाश डाला। कृषि विस्तार वैज्ञानिक डॉ. संजीव वर्मा ने बदलते मौसम में टिकाऊ कृषि के लिए फसल विविधीकरण और फसल अवशेष प्रबंधन को आवश्यक बताया।
पौध प्रजनक वैज्ञानिक डॉ. संजय जैन ने बताया कि अल नीनो से फसल प्रभावित होने की स्थिति में वैकल्पिक फसलों एवं उनकी उपयुक्त किस्मों का चयन किसानों के लिए लाभकारी हो सकता है। खाद्य वैज्ञानिक डॉ. एम.पी. इंगले ने श्री अन्न (मिलेट्स) के पोषण एवं आर्थिक महत्व की जानकारी दी तथा प्रतिभागियों को प्रक्षेत्र भ्रमण भी कराया।
समापन अवसर पर कृषि विभाग के उप संचालक आर.जी. रजक और परियोजना संचालक आत्मा सुरेंद्र पराते ने कृषि अधिकारियों से प्रशिक्षण में प्राप्त वैज्ञानिक जानकारी और आधुनिक कृषि तकनीकों को गांव-गांव तक पहुंचाकर किसानों को जलवायु परिवर्तन की चुनौतियों से निपटने में सहयोग करने का आह्वान किया।
हिंदी हिन्दुस्तान की स्वीकृति से एचटीडीएस कॉन्टेंट सर्विसेज़ द्वारा प्रकाशित