हैदराबाद , जुलाई 21 -- तेलंगाना के उपमुख्यमंत्री भट्टी विक्रमार्क ने मंगलवार को कहा कि राज्य सरकार कृषि, पेयजल और बिजली आपूर्ति पर अल नीनो जैसे वैश्विक जलवायु परिवर्तनों के प्रभाव को कम करने के लिए व्यापक कार्ययोजना तैयार कर रही है।
श्री विक्रमार्क ने यहां रवींद्र भारती में 'प्रशांत महासागर के गर्म होने से तेलंगाना की तैयारियों तक' विषय पर राज्य स्तरीय जागरूकता संगोष्ठी को संबोधित करते हुए कहा कि सरकार न केवल प्रशासनिक उपायों पर ध्यान केंद्रित कर रही है, बल्कि लोगों में जागरूकता पैदा करने पर भी जोर दे रही है, ताकि उन्हें जलवायु संबंधी संभावित चुनौतियों के लिए तैयार होने में मदद मिल सके। उन्होंने कहा कि भूमध्यरेखीय प्रशांत महासागर में तापमान परिवर्तन तेलंगाना में मौसम के मिजाज, जल संसाधनों और ग्रामीण आजीविका को कैसे प्रभावित करते हैं, इसे समझने के लिए वैज्ञानिक अध्ययन किये जा रहे हैं।
उन्होंने कहा कि इन निष्कर्षों के आधार पर सरकार पीने के पानी, सिंचाई के पानी और मवेशियों तथा वन्यजीवों के लिए संसाधनों की पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए अग्रिम रणनीतियां तैयार कर रही है। इसका उद्देश्य व्यक्तिगत, पारिवारिक, ग्राम, मंडल और जिला स्तर पर जागरूकता पैदा करना है, ताकि समुदाय अल नीनो के संभावित प्रभावों के लिए पहले से ही तैयार हो सकें।
श्री भट्टी ने कहा कि सूखे जैसी स्थिति के दौरान नुकसान को कम करने के लिए सरकार किसानों को कम पानी की आवश्यकता वाली वैकल्पिक फसलों को अपनाने के लिए प्रोत्साहित कर रही है।
उन्होंने ग्रामीण परिवारों तक जलवायु संबंधी मुद्दों की जानकारी पहुंचाने के लिए मीडिया की भी सराहना की। ऊर्जा क्षेत्र की तैयारियों पर उन्होंने कहा कि सरकार बढ़ते तापमान के कारण बिजली की बढ़ी मांग को पूरा करने के लिए स्मार्ट ऊर्जा प्रबंधन रणनीतियों को लागू कर रही है। उन्होंने कहा कि दिन के समय सौर ऊर्जा के अधिक उपयोग से सरकार और उपभोक्ताओं दोनों पर वित्तीय बोझ कम होगा, जबकि थर्मल बिजली उत्पादन का कुशल प्रबंधन ग्रिड की स्थिरता बनाये रखने में मदद करेगा।
उन्होंने ध्यान दिलाया कि मानसून का मौसम होने के बावजूद पंखों, एयर कंडीशनरों, बोरवेलों और लिफ्ट सिंचाई प्रणालियों के बढ़ते उपयोग के कारण तेलंगाना में बिजली की खपत भीषण गर्मी के स्तर तक पहुंच गयी है। उन्होंने कहा कि वैश्विक मौसम के बदलते पैटर्न बिजली की मांग को प्रभावित कर रहे हैं और राज्य में निर्बाध बिजली आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए अग्रिम कदम उठाया जा रहा है।
श्री भट्टी ने विषय विशेषज्ञों की भागीदारी के साथ संगोष्ठी आयोजित करने के लिए योजना विभाग की सराहना की और जलवायु संबंधी चुनौतियों से निपटने की तैयारियों में कृषि, ऊर्जा, सिंचाई और भूजल विभागों के बीच समन्वय की प्रशंसा की। उन्होंने अधिकारियों को जनभागीदारी और तैयारियों को बढ़ाने के लिए जिलों में भी इसी तरह के जागरूकता कार्यक्रम आयोजित करने के निर्देश दिये।
संगोष्ठी में मंत्री मोहम्मद अजहरुद्दीन, ऊर्जा विभाग के विशेष मुख्य सचिव नवीन मित्तल, योजना सचिव गौरव उप्पल, आईएएस अधिकारी दिव्या देवराजन, गोपी और जितेश वी पाटिल, योजना निदेशक रूफस दत्तम् तथा अन्य अधिकारी शामिल हुए।
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