बैतूल , अक्टूबर 07 -- मध्यप्रदेश के बैतूल जिले में इस वर्ष अल्पवर्षा के कारण जलाशयों में कम जलभराव की स्थिति को देखते हुए आगामी रबी सीजन के लिए कार्ययोजना तैयार की गई है। कलेक्ट्रेट सभाकक्ष में आयोजित बैठक में पेयजल, सिंचाई और फसल प्रबंधन को लेकर निर्णय लिए गए।
बैठक में केंद्रीय जनजातीय कार्य मंत्री दुर्गादास उइके, भाजपा प्रदेश अध्यक्ष एवं विधायक हेमंत खंडेलवाल सहित जिले के जनप्रतिनिधि और अधिकारी मौजूद रहे। अधिकारियों के अनुसार जिले के 200 जलाशयों की कुल क्षमता 472 एमसीएम है, जबकि वर्तमान में 242 एमसीएम पानी उपलब्ध है। इनमें 127 जलाशय पूरी तरह खाली हैं।
उपलब्ध पानी के विवेकपूर्ण उपयोग के लिए तय किया गया कि जिन जलाशयों में 50 प्रतिशत से कम जलभराव है, वहां का पानी केवल पेयजल और निस्तार के लिए सुरक्षित रखा जाएगा। 50 से 80 प्रतिशत भराव वाले जलाशयों से किसानों को एक पलेवा और एक सिंचाई के लिए पानी दिया जाएगा, जबकि 90 प्रतिशत से अधिक भराव वाले जलाशयों से दो सिंचाई के लिए पानी दिया जा सकेगा। दिसंबर के बाद उपलब्ध संपूर्ण जल मुख्य रूप से पेयजल के लिए आरक्षित किया जाएगा।
कम पानी की उपलब्धता को देखते हुए किसानों को गेहूं के बजाय कम पानी की आवश्यकता वाली फसलों की बुवाई के लिए प्रेरित किया जा रहा है। कृषि विभाग के अनुसार इस वर्ष गेहूं का रकबा करीब 80 हजार हेक्टेयर कम रहने की संभावना है। वहीं चने का रकबा 47 हजार से बढ़कर 94 हजार हेक्टेयर तथा सरसों का रकबा 13 हजार से बढ़कर 25 हजार हेक्टेयर होने का अनुमान है। ग्रामीण क्षेत्रों में जल संरक्षण के लिए स्टॉप डेमों में कड़ी शटर लगाने और नालों में बोरी बंधान के कार्य भी किए जा रहे हैं।
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