बैतूल , अक्टूबर 19 -- मध्यप्रदेश के बैतूल जिले में सामान्य से कम बारिश और मानसून की समय से पहले विदाई के कारण किसानों की मुश्किलें बढ़ गई हैं। खरीफ फसलों को बचाने के लिए किसान कुओं और ट्यूबवेल से सिंचाई कर रहे हैं, जिससे रबी सीजन के लिए बचाकर रखा गया पानी भी खर्च हो रहा है। इससे आगामी रबी फसलों की बुआई पर संकट मंडराने लगा है।

मौसम के आंकड़ों के अनुसार, इस वर्ष जिले में सामान्य औसत की तुलना में करीब 66 प्रतिशत बारिश दर्ज की गई। मानसून की विदाई तक 28.87 इंच वर्षा हुई, जो सामान्य से लगभग 14.5 इंच कम है। सितंबर के दूसरे पखवाड़े में मानसून की विदाई के बाद जलाशयों, तालाबों और नदी-नालों में पानी की कमी हो गई है। भूजल स्तर गिरने से कुओं और ट्यूबवेल का जलस्तर भी तेजी से नीचे जा रहा है।

किसानों के सामने धान, मूंगफली और गन्ने की फसलों को बचाने की चुनौती है। पाढर गांव के किसान रिंकू मालवीय और अशोक राठौर के अनुसार, धान की फसल को पकने तक पानी देना पड़ रहा है। वहीं, नीमपानी गांव के किसान अजय बाजपेयी ने बताया कि नमी की कमी से मूंगफली के पौधे उखाड़ते समय टूट रहे हैं और फलियां जमीन में रह जा रही हैं। गन्ने की फसल को भी लगभग एक महीने तक सिंचाई की जरूरत है।

किसानों का कहना है कि वे गेहूं के लिए पर्याप्त पानी उपलब्ध नहीं होने के कारण चना और सरसों जैसी कम पानी वाली रबी फसलों की उम्मीद कर रहे थे, लेकिन खरीफ फसलों को बचाने में कुओं और ट्यूबवेल का पानी खर्च हो रहा है। यदि जल संकट बना रहा, तो जिले में रबी फसलों की बुआई आधे से भी कम रह जाने की आशंका है।

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