सिलीगुड़ी , जून 15 -- पश्चिम बंगाल के वन मंत्री मनोज कुमार उरांव ने उत्तर बंगाल, खासकर अलीपुरद्वार जिले में पर्यावरण के दृष्टिकोण से समृद्ध सिकियाझोरा इलाके में पर्यटन की पूरी संभावनाओं को उजागर करने के लिए अपने मंत्रालय और अन्य विभागों के बीच बेहतर तालमेल की आवश्यकता पर बल दिया है।

'बंगाल का अमेज़न' कहे जाने वाले सिकियाझोरा के अपने पहले आधिकारिक दौरे में मंत्री ने कहा कि अतीत में वन एवं पर्यटन विभागों के बीच तालमेल की कमी के कारण कई विकास कार्यों में बाधा आई और इलाके में पर्यटन से जुड़ी सुविधाओं के विस्तार में देरी हुई।

श्री उरांव ने रविवार शाम पत्रकारों से कहा, "सिकियाझोरा राज्य के सबसे अच्छे जैव-पर्यटन स्थलों में से एक है। वन एवं पर्यटन विभागों के आपसी सहयोग के बिना यहां पर्यटन का विकास संभव नहीं है।"मंत्री ने कहा कि उन्होंने पर्यटन मंत्री शंकर घोष के साथ पहले ही बातचीत कर ली है और अब दोनों विभाग मिलकर इस इलाके के लिए एक व्यापक विकास योजना बनाएंगे। उन्होंने संकेत दिया कि अगले कुछ दिनों में इलाके में पर्यटन विकास को लेकर बड़ी घोषणा की जा सकती है।

श्री उरांव ने यह भी संकेत दिया कि राज्य सरकार इस इलाके में वन्यजीव आधारित पर्यटन को और मज़बूत करने के उपायों पर विचार कर रही है। उन्होंने कहा कि सिकियाझोरा के लिए भविष्य की योजनाओं के बारे में औपचारिक घोषणा इस महीने के आखिर में की जा सकती है जिसमें संभवतः मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी और केंद्रीय वन मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारी भी मौजूद रहेंगे।

श्री उरांव ने कहा कि उनकी प्राथमिकता इलाके के पर्यावरण को बहाल करना और उसे बनाए रखना है। उन्होंने आगे कहा कि जब वहां का पारिस्थितिक माहौल अनुकूल हो जाएगा तो वह उस इलाके में एक बाघ लाना चाहेंगे। उन्होंने इस क्षेत्र को 'बंगाल का अमेज़न' बनने की क्षमता वाला करार दिया।

वन मंत्री ने कहा कि सरकार अलीपुरद्वार के आस-पास एक एकीकृत पर्यटन सर्किट विकसित करने की योजना बना रही है जिससे पर्यटक ज़िले की अलग-अलग जगहों को देखने में तीन से चार दिन बिता सकें।

मंत्री के दौरे के दौरान, पर्यटन गतिविधियों में शामिल 28 स्वयं-सहायता समूहों के सदस्यों ने बेहतर अवसंरचना और आजीविका के लिए ज़्यादा मदद की मांग करते हुए एक ज्ञापन सौंपा। उन्होंने स्थानीय ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मज़बूत करने में पर्यटन की भूमिका पर बल दिया और सरकार से इलाके में सुविधाओं का विस्तार करने का आग्रह किया।

उनकी मांगों में पर्यटन नाव चलाना, पर्यटकों और नाव चलाने वालों के लिए सुरक्षा के बेहतर इंतज़ाम करना, नदी के किनारों के जोखिम वाले हिस्सों पर सुरक्षा के लिए बाड़ लगाना और स्थानीय वन्यजीवों को दिखाने के लिए बेहतर व्यवस्था करना शामिल है।

इस क्षेत्र में पर्यटन गतिविधियों से जुड़ी एक स्व-सहायता समूह की सदस्य मरियम किस्कू ने कहा कि अतिरिक्त अवसंरचना एवं पर्यटन से होने वाली आमदनी का अधिक हिस्सा स्थानीय निवासियों के लिए स्थायी जीविकोपार्जन सुनिश्चित करने में मदद करेगा जो इस क्षेत्र पर निर्भर हैं।

अधिकारियों ने कहा कि हाल के वर्षों में सिकियाझोरा एक अहम जैव-पर्यटन स्थल बनकर उभरा है। यह अपने जलमार्गों के नेटवर्क, समृद्ध जैव-विविधता और समुदाय के नेतृत्व वाली पर्यटन पहलों के ज़रिए पर्यटकों को आकर्षित करता है।

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