अलवर , मार्च 18 -- राजस्थान में अलवर जिले के महत्वपूर्ण बाघ आवास (सीटीएच) के मुद्दे को लेकर बुधवार को जिला कलेक्टर कार्यालय में आयोजित बैठक में माहौल बेहद गरमाया रहा।

प्राप्त जानकारी के अनुसार बैठक में बड़ी संख्या में ग्रामीण पहुंचे और अपनी जमीन, आजीविका एवं भविष्य को लेकर गहरी चिंता जाहिर की। इस दौरान विपक्ष के नेता टीकाराम जूली भी मौके पर पहुंचे और उन्होंने प्रशासन एवं सरकार पर गंभीर आरोप लगाए।पर्यावरणविद् सहित अन्य लोगों ने सरकार से एक ही सवाल पूछा कि आखिर सीटीएच का क्षेत्र क्यों बदला जा रहा है। अभी हाल ही में वन विभाग के अधिकारियों द्वारा किए गए 18 करोड़ के घोटाले वाले अधिकारी भी बैठक में आए हैं।

जिला कलेक्टर आर्तिका शुक्ला की अध्यक्षता में हुई बैठक में ग्रामीणों ने सरकार पर बर्बाद करने का आरोप लगाया और यहां तक कहा कि आप कहे तो हम इलाका ही छोड़ जाएं। ग्रामीणों ने बताया कि सरकार द्वारा जिस क्षेत्र को सीटीएच में जोड़ा जा रहा है वहां पहले से ही वन्यजीवों से किसान परेशान है। उनकी फैसले बर्बाद हो रही है और किसानों के सामने आर्थिक संकट भी आया हुआ है।

उन्होंने सरकार से सवाल किया कि सरकार को चाहिए कि वन्यजीवों की उचित निगरानी करें और चारदीवारी बनवाएं जिससे जंगल से वन्यजीव आबादी की और न घुसें। सरकार का ध्यान सिर्फ किसानों को बर्बाद करने पर है। ग्रामीणों ने कहा कि किसानों के पास छोटी-छोटी जमीन है। वे अपना पेट कैसे भरेंगे। सारी फसलों को वन्य जीव चौपट कर रहे हैं। सरकार द्वारा मांगी गई आपत्तियों को लेकर उन्होंने कहा कि हम नए सीटीएच क्षेत्र में शामिल होने के लिए तैयार नहीं हैं। इस पर विचार करें और सरकार ने जबरदस्ती की तो बड़ा आंदोलन भी किया जा सकता है।

पत्रकारों से बातचीत करते हुए श्री जूली ने कहा कि सीटीएच के नाम पर सरकार और प्रशासन जनता को गुमराह कर रहे हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि इस पूरे मामले में करोड़ों रुपए का घोटाला हुआ है, लेकिन इसका जवाब किसी के पास नहीं है।श्री जूली ने सवाल उठाया कि क्या अधिकारी इस मामले में मिले हुए हैं या फिर किसी दबाव में काम कर रहे हैं।

उन्होंने यह भी कहा कि अलवर जिले से दो मंत्री होने के बावजूद इस गंभीर मुद्दे पर कोई ठोस निर्णय नहीं लिया जा रहा है, जो सरकार की मंशा पर सवाल खड़े करता है। उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि कांग्रेस इस मुद्दे पर पीछे नहीं हटेगी और जरूरत पड़ी तो इस लड़ाई को अदालत तक लेकर जाया जाएगा।

श्री जूली ने सरिस्का क्षेत्र के विकास पर जोर देते हुए कहा कि सरिस्का बाघ अभयारण्य अलवर की पहचान है और यहां का संतुलित विकास जरूरी है। सरिस्का खत्म होता है तो हजारों लोगों का रोजगार भी समाप्त हो जाएगा, जिससे क्षेत्र की अर्थव्यवस्था पर गहरा असर पड़ेगा। जिले के टुकड़े होने के बाद सरिस्का ही आय का स्रोत बचा है।

उन्होंने कहा कि कांग्रेस सरिस्का और अलवर के समग्र विकास के पक्ष में है, लेकिन विकास के नाम पर किसानों और ग्रामीणों के हितों की अनदेखी किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं की जाएगी। जहां बाघों का प्रजनन क्षेत्र है, उस क्षेत्र को हटाकर अलवर शहर के समीप वाले क्षेत्र को क्यों जोड़ा जा रहा है। सीटीएच क्षेत्र के कारण ही वर्तमान में सरिस्का में बाघों की संख्या 52 तक पहुंची है।

उन्होंने आरोप लगाया कि बड़े उद्योगों को फायदा पहुंचाने के लिए गरीब किसानों को बर्बाद किया जा रहा है। सरकार के लोगों को वन की नहीं खदान के लोगों की चिंता ज्यादा है।

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