अलवर , अक्टूबर 20 -- राजस्थान में अलवर में विजयादशमी पर्व पर दशहरा मैदान में बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक रावण दहन का कार्यक्रम उत्साह और उल्लास के साथ संपन्न हुआ।

इस बार 65 फुट ऊंचे रावण, 60 फुट के कुंभकरण और 55 फुट के मेघनाथ के पुतलों का दहन किया गया। आकर्षक आतिशबाजी और आधुनिक तकनीक से तैयार पुतलों ने दर्शकों का ध्यान खींचा।

पुतलों की आंखें, हाथ और सिर हिलने के साथ जीभ से चिंगारियां निकलने का दृश्य लोगों के लिए खास आकर्षण रहा। रिमोट तकनीक के जरिए पुतलों का दहन किया गया, जिससे कार्यक्रम को व्यवस्थित तरीके से संपन्न कराने में मदद मिली।

अलवर पुरुषार्थी समिति की ओर से आयोजित दशहरा कार्यक्रम को भव्य बनाने के लिए इस बार पुतलों और आतिशबाजी में विशेष तकनीक का इस्तेमाल किया गया। रावण, कुंभकरण और मेघनाथ के पुतले आगरा के कारीगरों द्वारा तैयार करवाए गए, जबकि आतिशबाजी की व्यवस्था के लिए गाजियाबाद से कारीगर बुलाए गए थे। एक पुतले के निर्माण पर करीब ढाई से तीन लाख रुपये तक खर्च होने का अनुमान था। पिछले वर्ष बारिश के कारण दहन में हुई देरी को देखते हुए इस बार रिमोट तकनीक अपनाई गई।

दशहरा मैदान में इस आयोजन के दौरान करीब 50 हजार लोगों के पहुंचने का अनुमान लगाया गया था। दर्शकों की सुविधा के लिए करीब पांच हजार लोगों के बैठने की व्यवस्था की गई थी। आयोजन को सुचारु और सुरक्षित बनाने के लिए नगर निगम, यूआईटी और संबंधित विभागों के सहयोग से अग्निशमन, चिकित्सा और अन्य जरूरी व्यवस्थाएं की गईं। विजयादशमी के अवसर पर रावण, कुंभकरण और मेघनाथ के पुतलों का दहन कर बुराई पर अच्छाई की जीत का संदेश दिया गया।

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