अलवर , जुलाई 17 -- राजस्थान के अलवर में जिला परिषद की साधारण सभा की बैठक शुक्रवार को हंगामेदार और विवादों से भरपूर रही।
बैठक में जनप्रतिनिधियों ने सरकार और प्रशासन के खिलाफ अनोखे तरीके से विरोध प्रदर्शन किया। कोई अपनी कुर्सी मोटर साइकिल पर बांधकर बैठक में पहुंचा तो कोई पत्थर की चक्की लेकर आया। बैठक के दौरान अधिकारियों की कार्यशैली, ग्रामीण विकास कार्यों और मूलभूत सुविधाओं के अभाव को लेकर सरकार पर जमकर निशाना साधा गया।
जिला परिषद की बैठक में एक बार फिर खैरथल-तिजारा और कोटपूतली-बहरोड़ जिलों के अधिकारी शामिल नहीं हुए। इस मुद्दे पर जनप्रतिनिधियों ने नाराजगी जताते हुए कहा कि बार-बार बुलाने के बावजूद अधिकारी बैठक में नहीं आते, जिससे ग्रामीण विकास के प्रस्ताव प्रभावित हो रहे हैं और विकास कार्यों पर प्रतिकूल असर पड़ रहा है।
निर्दलीय पार्षद और कांग्रेस समर्थित संदीप फौलादपुरिया पत्थर की बनी चक्की लेकर बैठक में पहुंचे। बैठक समाप्त होने के बाद उन्होंने यह चक्की जिला परिषद को सौंपते हुए कहा कि शाहजहांपुर क्षेत्र में मंत्री ने चक्की का उद्घाटन किया, जबकि वहां किसानों को बिजली, पानी, अस्पताल, एंबुलेंस, डॉक्टर और दवाइयों जैसी मूलभूत सुविधाओं की जरूरत है।
उन्होंने कहा, " जब किसानों को पानी और बिजली नहीं मिलेगी, तो वे अनाज कैसे उगाएंगे और जब अनाज ही नहीं होगा, तो चक्की का क्या काम। "उन्होंने चक्की मंत्री तक पहुंचाने की मांग करते हुए क्षेत्र में किसानों और ग्रामीणों के लिए आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराने की मांग उठायी।
कांग्रेस के जिला पार्षद जगदीश जाटव मोटर साइकिल के पीछे रस्सी से अपनी कुर्सी बांधकर बैठक में पहुंचे। उन्होंने कहा कि जब जिला प्रमुख के लिए ही सरकार उचित व्यवस्था नहीं कर पा रही है तो उन्हें अपनी कुर्सी खुद लेकर आनी पड़ रही है।
श्री जाटव ने सरकार पर निशाना साधते हुए कहा, " यह सरकार नहीं, बल्कि सर्कस चल रहा है। सरकार जनप्रतिनिधियों को दबाव में रखना चाहती है।"मुंडावर विधायक ललित यादव ने बैठक में सरकार और प्रशासन पर गंभीर आरोप लगाये। उन्होंने कहा कि सरकार पूरी तरह भ्रष्टाचार में लिप्त है और जिला परिषद की बैठकों में केवल औपचारिकताएं निभायी जाती हैं।
उन्होंने आरोप लगाया कि अधिकारी जनप्रतिनिधियों की बात नहीं सुनते और हर काम पहले से तय होता है। ईमानदार अधिकारियों को हटाकर ऐसे अधिकारियों को लगाया गया है जो कुछ लोगों के इशारों पर काम कर रहे हैं। श्री यादव ने कहा, " यहां प्रधान, जिला परिषद सदस्य और विधायक आते हैं, समोसा-कचौरी खाकर चले जाते हैं, लेकिन किसी भी बैठक के निर्णय पर अमल नहीं होता। जिस दिन यह व्यवस्था बदलेगी, उस दिन इन अधिकारियों की कार्यशैली का भी हिसाब होगा। "जिला परिषद की बैठक में कुर्सी और चक्की के जरिए किया गया प्रतीकात्मक विरोध पूरे दिन चर्चा का विषय बना रहा। जनप्रतिनिधियों ने इसे सरकार और प्रशासन की कार्यशैली के खिलाफ जनता की आवाज बताया और ग्रामीण क्षेत्रों की मूलभूत समस्याओं के समाधान की मांग उठायी।
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