, Aug. 13 -- उपमुख्यमंत्री ने बताया कि कैबिनेट ने शासकीय सेवा में कार्यरत दिव्यांग कर्मचारियों को पदोन्नति में आरक्षण का नोशनल बेनेफिट 30 जून, 2016 से दिये के लिए राजस्थान दिव्यांगजन अधिकार (संशोधन) नियम-2026 का अनुमोदन किया है। वर्ष 2026-27 की बजट घोषणा की अनुपालना में किये गए इस फैसले से राज्य के दिव्यांग कार्मिकों की वर्षों पुरानी मांग पूरी हुई है। राज्य में दिव्यांगों को पदोन्नति में दिये जा रहे 4 प्रतिशत आरक्षण के तहत अब 30 जून, 2016 से नोशनल बेनेफिट दिया जाएगा।
उन्होंने बताया कि कैबिनेट ने मृत सरकारी कर्मचारियों के अनुकम्पा नियुक्ति हेतु पात्र आश्रितों की सूची में 'पुत्र वधू' को भी शामिल करने का निर्णय किया है। बजट घोषणा की अनुपालना में किये गये इस फैसले से मृतक सरकारी कर्मचारी की पुत्र वधू को अनुकम्पा नियुक्ति मिल सकेगी, जिससे वह परिवार का भरण-पोषण भली-भांति कर सकेगी।
उन्होंने बताया कि अब राजपत्रित पद पर नियुक्ति के बाद प्रशिक्षण के दौरान या प्रशिक्षण समाप्ति से दो वर्ष की अवधि में पद त्याग करने पर कार्मिकों से केवल प्रशिक्षण व्यय की वसूली होगी, उनसे वेतन-भत्तों की वसूली नहीं की जाएगी। वहीं, राज्य या केंद्र सरकार के विभागों अथवा उपक्रमों में नयी नियुक्ति के फलस्वरूप पद त्याग करने पर प्रशिक्षण के दौरान भुगतान किए गए वेतन-भत्तों के साथ-साथ प्रशिक्षण व्यय की भी कोई वसूली नहीं की जाएगी। इसके अलावा, एकल महिला राज्य कर्मचारियों को चाईल्ड केयर लीव एक कैलेण्डर वर्ष में 3 के स्थान पर 6 चरणों में स्वीकृत की जा सकेगी। सरोगेसी से मातृत्व प्राप्त करने के मामलों में सरोगेट मदर को 180 दिन तथा कमीशनिंग मदर को 90 दिन का मातृत्व अवकाश प्रदान किया जाएगा। इससे ये महिला कर्मचारी अपने बच्चों की बेहतर देखभाल कर सकेंगी। इन प्रावधानों के लिए मंत्रिमंडल ने राजस्थान सेवा नियम-1951 में संशोधनों को मंजूरी दी है।
उपमुख्यमंत्री ने बताया कि कैबिनेट ने जनजाति क्षेत्रीय विकास विभाग द्वारा संचालित राजकीय आवासीय विद्यालयों एवं छात्रावासों में वार्डन के पदों पर भर्ती का मार्ग प्रशस्त करने के लिए राजस्थान जनजाति क्षेत्रीय विकास राज्य एवं अधीनस्थ सेवा (भर्ती एवं सेवा की अन्य शर्तें) नियम, 2001 में संशोधन का अनुमोदन किया है। इसमें परीक्षा स्कीम, निगेटिव मार्किंग, न्यूनतम पासिंग माक्र्स 40 प्रतिशत एवं विस्तृत पाठ्यक्रम के प्रावधान जोड़े गये हैं। इस निर्णय से टीएडी विभाग में छात्रावास अधीक्षक महिला ग्रेड-2 के 254 पद सहित छात्रावास अधीक्षक ग्रेड-2 के कुल 470 पद को राजस्थान अधीनस्थ एवं मंत्रालयिक सेवा समान पात्रता परीक्षा के माध्यम से भरा जा सकेगा। पहले ये पद शिक्षा विभाग से प्रतिनियुक्ति पर भरे जाते थे।
उन्होंने बताया कि राजस्थान वन अधीनस्थ सेवा नियम, 2015 में संशोधनों को मंत्रिमंडल की बैठक में स्वीकृति प्रदान की गई। इससे वनरक्षक पद से सहायक वनपाल, सहायक वनपाल पद से वनपाल एवं सर्वेयर से कनिष्ठ अभियंता के पदों पर पदोन्नति का मार्ग प्रशस्त होगा।
उन्होंने बताया कि वित्त विभाग की अधिसूचना दिनांक 11 दिसम्बर, 2024 के द्वारा राजस्थान सिविल सेवा (संशोधित वेतन) नियम, 2017 में हुए संशोधन में विभिन्न विभागों में पदोन्नति के अवसर बढ़ाए गए थे। इसमें समेकित बाल विकास सेवा के संयुक्त निदेशक एवं कार्यक्रम निदेशक/अतिरिक्त निदेशक के दो नवीन पदनाम भी थे। अब इन पदों को राजस्थान समेकित बाल विकास (राज्य एवं अधीनस्थ) सेवा नियम, 1998 में सम्मिलित किया गया है। पदोन्नति के इन दो अतिरिक्त अवसरों से आईसीडीएस में विभागीय कार्यों में गुणवत्ता और प्रभावी नियंत्रण स्थापित होगा।
श्री चौधरी ने बताया कि मैसर्स अल्ट्राटेक सीमेन्ट लिमिटेड को जैसलमेर जिले के ग्राम पारेवर में करीब 306 हेक्टेयर औद्योगिक भूमि के आवंटन की मंजूरी दी गयी है। उन्होंने बताया कि प्रदेश में अक्षय ऊर्जा उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए चार अक्षय ऊर्जा परियोजनाओं के लिए भूमि आवंटन के प्रस्तावों का अनुमोदन भी आज किया गया। प्रस्तावों के अनुसार बीकानेर जिले की तहसील पूगल के ग्राम बरजू में लगभग 228 हेक्टेयर, जैसलमेर जिले की उपनिवेशन तहसील रामगढ़ 2 के ग्राम रामगढ़ बारानी दक्षिण में लगभग 485 हेक्टेयर भूमि सौर ऊर्जा परियोजनाओं के लिए एवं जैसलमेर जिले की तहसील फतेहगढ़ के ग्राम तोगा और नीम्बा में 178 हेक्टेयर भूमि और बाड़मेर जिले की तहसील शिव के ग्राम लीकड़ी में लगभग 51 हेक्टेयर भूमि सोलर-विंड हाइब्रिड परियोजना के लिए सशर्त कीमतन आवंटन की स्वीकृति दी गयी है।
उन्होंने बताया कि राज्य मंत्रिमंडल ने जिला जैसलमेर की उपनिवेशन तहसील नाचना-1 के ग्राम चिन्नू में एस्केप जलाशय (आरडी 1121) के निर्माण से प्रभावित 21 गैर-खातेदार काश्तकारों को उसी गांव में भूमि आवंटित करने के प्रस्ताव को स्वीकृति दी है। इस निर्णय को एक विशेष परिस्थिति मानते हुए अपवाद स्वरूप मंजूरी दी गयी है, ताकि प्रभावित काश्तकारों का पुनर्वास हो सके और वर्षों पुराना विवाद सुलझ सके। इंदिरा गांधी मुख्य नहर की बुर्जी 1121 पर एस्केप चैनल निर्माण के लिए वर्ष 1999 में 21 काश्तकारों की लगभग 722 बीघा भूमि ली गयी थी। उस समय औपचारिक भूमि अवाप्ति की प्रक्रिया पूरी किये बिना ही भूमि एस्केप चैनल के नाम दर्ज कर दी गयी थी और काश्तकारों को विकल्प के रूप में अन्यत्र भूमि नहीं मिल सकी थी। यह एस्केप जलाशय जल जीवन मिशन के तहत जोधपुर शहर को पीने का पानी उपलब्ध कराने के लिए अत्यंत आवश्यक प्रोजेक्ट है। मानसून के दौरान नहर से मिलने वाले अतिरिक्त पानी का इस जलाशय में संग्रहण हो सकेगा, जिससे जोधपुर को नियमित जल आपूर्ति में मदद मिलेगी।
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