पटना , अक्टूबर 29 -- बिहार के बहुचर्चित अलकतरा घोटाले के एक मामले में ट्रांसपोर्टर दूधेश्वर नाथ सिंह उर्फ डीएन सिंह ने गुरुवार को अपना अपराध स्वीकार कर लिया।

इसके बाद पटना स्थित केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) की विशेष अदालत ने उसे एक वर्ष चार माह 18 दिन के कारावास और 29 लाख रुपये जुर्माने की सजा सुनाई।

दोषी की ओर से जेल में बिताई गई अवधि को सजा में समायोजित कर दिया गया है। उसने जुर्माने की राशि अदालत में जमा कर दी, जिसके बाद उसके खिलाफ मुकदमे का निष्पादन कर दिया गया।

सीबीआई की विशेष अदालत संख्या-दो के न्यायाधीश मोहम्मद रुस्तम ने दोष स्वीकारोक्ति संबंधी आवेदन पर सुनवाई और बयान दर्ज करने के बाद यह फैसला सुनाया। दोषी को यह सजा भारतीय दंड विधान की धारा 420, 467, 468, 471 और 120बी के तहत सजा सुनाई गई। इस मामले में तत्कालीन पथ निर्माण मंत्री मोहम्मद इलियास हुसैन और तत्कालीन निदेशक, क्रय एवं परिवहन केदार पासवान के खिलाफ अंतिम बहस जारी है।

मामले के विशेष लोक अभियोजक राकेश दुबे के अनुसार, यह मामला वर्ष 1994 का है। आरोप था कि आपराधिक षड्यंत्र के तहत ट्रांसपोर्टर दूधेश्वर नाथ सिंह ने बरौनी रिफाइनरी से 494.68 मीट्रिक टन अलकतरा का उठाव किया था। इसे जमुई पथ निर्माण प्रमंडल में पहुंचाया जाना था, लेकिन अलकतरा गायब कर दिया गया। इसकी कीमत 28 लाख 43 हजार 555 रुपये आंकी गई थी।

इस मामले में वर्ष 1996 में बरौनी थाने में प्राथमिकी दर्ज की गई थी। बाद में पटना उच्च न्यायालय के आदेश पर सीबीआई ने जांच अपने हाथ में लेकर आरसी 9(एस)/1997 के तहत प्राथमिकी दर्ज की।

जांच के बाद एजेंसी ने छह आरोपितों के खिलाफ आरोपपत्र दाखिल किया था। इनमें ट्रांसपोर्टर दूधेश्वर नाथ सिंह, तत्कालीन पथ निर्माण मंत्री मोहम्मद इलियास हुसैन, तत्कालीन निदेशक केदार पासवान, तत्कालीन अभियंता प्रमुख डीएन बैठा, तत्कालीन उपनिदेशक मुजतबा अहमद और मदन मोहन प्रसाद शामिल थे।

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