देहरादून, फरवरी 18 -- उत्तराखंड में बीते 10 फरवरी 2026 को भारतीय रिजर्व बैंक ने अर्बन कोऑपरेटिव बैंक पर 6 महीने के लिए सभी वित्तीय लेनदेन पर रोक लगा दी है।
इससे बैंक में लगभग 9 हजार खाता धारकों के करीब 90 करोड रुपए फंस गए हैं।जिसके बाद खाता धारकों को अपनी मेहनत की कमाई की चिंता सताने लग गई है।
वहीं अर्बन कोऑपरेटिव बैंक के खाता धारकों ने बुधवार को देहरादून के लैंसडाउन चौक स्थित उत्तरांचल प्रेस क्लब में पत्रकारों से बातचीत करते हुए कहा कि उन्होंने अपने जीवन भर की पूंजी एफडीआई के रूप में बैंक में जमा कराई थी, कई लोगों ने करंट अकाउंट और सेविंग खाते भी खुलवाये थे।किंतु फिलहाल आरबीआई ने किसी भी प्रकार के खाते, चालू आवर्ती या सावधी जमा से रकम निकालने की रोक लगा दी है।
इससे व्यापारी वर्ग का सारा कार्य बाधित हो गया है। व्यापारी किसी भी देनदारों को राशि का भुगतान नहीं कर पा रहे हैं। बैंक में प्रतिबंध लगने से उनके सामने रोजी-रोटी की समस्या भी उत्पन्न हो गई है।
बैंक के खातेदार संजीव वर्मा ने कहा कि बैंक में हुए कथित घोटाले का कारण भारतीय रिजर्व बैंक ने 2013-14 में दर्शाया है, उन्होंने हैरानी जताई कि आरबीआई की तरफ से हर साल बैंकों का ऑडिट किए जाने के बावजूद अब यह घोटाला 12 वर्षों के बाद पकड़ में आया है।
उन्होंने कहा कि जब बैंक में घोटाला वर्ष 2013-14 मे हुआ था तब आरबीआई ने एक्शन क्यों नहीं लिया। इतने वर्षों बाद अब यह घोटाला बढ़कर 38 करोड रुपए तक पहुंच गया है।
अगर भारतीय रिजर्व बैंक पहले ही कार्रवाई करते तो इतना बड़ा घोटाला सामने नहीं आता और 9 हजार खाता धारक आज प्रभावित नहीं होते।
उन्होंने मांग उठाई कि बैंक के सचिव और बैंक के अध्यक्ष के साथ-साथ आरबीआई के जो अधिकारी इस घोटाले में लिप्त है उनके खिलाफ शासन कठोर कार्रवाई करें, और खाता धारकों की जमा राशि वापस करने की प्रक्रिया प्रारंभ की जाए।
बैंक के अकाउंट होल्डर रजत अग्रवाल ने मुख्यमंत्री और सहकारिता मंत्री से आग्रह किया है कि अर्बन कोऑपरेटिव बैंक के एनपीए अकाउंट्स की जांच करते हुए पैसा वसूली की कार्रवाई शुरू की जाए, बैंक की तरफ से जो ऋण स्वीकृत गए, उनकी भी गहनता से जांच की जाए।
उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ रसूखदारों ने बैंक से बिना गारंटी के ऋण प्राप्त किया है। उनसे भी वसूली की कार्रवाई की जाए।
इस दौरान बैंक के खाता धारकों ने सरकार को चेताया कि अगर उनकी मांगों को नजरअंदाज किया तो उन्हें धरने प्रदर्शन और सड़कों पर उतरने के लिए मजबूर होना पड़ेगा।
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