ईटानगर , मई 26 -- अरुणाचल प्रदेश के राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल (सेवानिवृत्त) के. टी. परनाइक ने मंगलवार को विकसित भारत के दृष्टिकोण में योगदान देने के लिए कानूनी शिक्षा, अनुसंधान और संस्थागत अनुशासन को मजबूत करने की आवश्यकता पर बल दिया।

राज्यपाल ने राजधानी ईटानगर से लगभग 27 किलोमीटर दूर जोते में स्थित जारबोम गामलिन सरकारी विधि महाविद्यालय का दौरा के समय यह बात कही।

श्री परनाइक ने शिक्षा आयुक्त अमजद टाक, उच्च एवं तकनीकी शिक्षा निदेशक मिलोराई मोदी, पापुम पारे के उपायुक्त लोबसांग त्सेरिंग और महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ. गीजो जॉर्ज के साथ परिसर के विभिन्न हिस्सों का दौरा किया और संस्थान के बुनियादी ढांचे तथा शैक्षणिक गतिविधियों की समीक्षा की।

छात्रों, संकाय सदस्यों और अधिकारियों को संबोधित करते हुए राज्यपाल ने जोर दिया कि राज्य के एकमात्र सरकारी कानून महाविद्यालय को कानूनी अनुसंधान, सामुदायिक कानूनी पहुंच, तकनीक-संचालित कानूनी शिक्षा और नैतिक नेतृत्व को मजबूत करने पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए। उन्होंने संवैधानिक शासन, साइबर कानून, स्वदेशी अधिकार, पर्यावरण संरक्षण, सीमा मुद्दे और आदिवासी अधिकारों से संबंधित अध्ययन के महत्व पर प्रकाश डाला, साथ ही सक्रिय कानूनी सहायता केंद्रों और कृत्रिम बुद्धिमत्ता-सहायता प्राप्त कानूनी अनुसंधान को बढ़ावा देने के लिए प्रोत्साहित किया।

राज्यपाल ने विश्वास व्यक्त किया कि यह संस्थान गुणवत्तापूर्ण कानूनी शिक्षा और जनसेवा के माध्यम से न्याय, ज्ञान और मानवीय गरिमा के प्रतीक के रूप में उभरेगा। उन्होंने कहा कि कानून का लक्ष्य न्याय है और कानूनी शिक्षा पर निष्पक्षता, सत्य और मानवता की सेवा को बढ़ावा देने की जिम्मेदारी है। छात्रों से कानून को आम नागरिकों के लिए न्याय के प्रति समर्पित एक सार्वजनिक विश्वास के रूप में देखने का आग्रह करते हुए उन्होंने उन्हें जुनून, सहानुभूति और नैतिक प्रतिबद्धता के साथ इस पेशे को अपनाने के लिए प्रोत्साहित किया। डिजिटल अदालतों, ई-फाइलिंग और आभासी सुनवाई जैसे घटनाक्रमों का उल्लेख करते हुए राज्यपाल ने कहा कि आधुनिक युग में कानूनी पेशा तेजी से प्रासंगिक हो गया है और उन्होंने छात्रों से कानूनी ज्ञान को सामाजिक संवेदनशीलता और अखंडता के साथ जोड़ने का आह्वान किया।

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