ईटानगर , अगस्त 22 -- अरुणाचल प्रदेश के राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल (सेवानिवृत्त) केटी परनाइक ने राज्य में बच्चों की सुरक्षा के लिए अधिक मजबूत और निवारक उपाय किये जाने का आह्वान किया तथा बच्चों का कल्याण सरकार और समाज की सामूहिक जिम्मेदारी होनी चाहिए।

राज्यपाल ने शनिवार को यहां अरुणाचल प्रदेश राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग (एपीएससीपीसीआर) की अध्यक्ष रतन अन्या के नेतृत्व में उनसे मिलने पहुंचे प्रतिनिधिमंडल से यह बात कही।

बैठक के दौरान अध्यक्ष ने राज्यपाल को 31 जुलाई और एक अगस्त को तवांग में आयोजित बाल अधिकारों पर दो दिवसीय पूर्वोत्तर राज्यों के बाल अधिकार संरक्षण आयोगों (एससीपीसीआर) के सम्मेलन के परिणामों की जानकारी दी। इस सम्मेलन में पूर्वोत्तर भर के बाल अधिकार संस्थानों ने हिस्सा लिया, जहां बच्चों की सुरक्षा के लिए उभरती चुनौतियों, उत्कृष्ट तौर-तरीकों और सहयोगात्मक रणनीतियों पर विचार-विमर्श किया गया।

इस पहल की सराहना करते हुए जनरल परनाइक ने कहा कि हर बच्चा सुरक्षित बचपन, गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, अच्छे स्वास्थ्य, शोषण से सुरक्षा और अपनी क्षमता को साबित करने के समान अवसरों का हकदार है। उन्होंने एपीएससीपीसीआर से न केवल बाल अधिकारों के लिए एक सतर्क प्रहरी के रूप में काम करने का आग्रह किया, बल्कि एक बाल-अनुकूल अरुणाचल प्रदेश के निर्माण में उत्प्रेरक बनने का भी आह्वान किया, जहां बच्चे सम्मान, सुरक्षा, आत्मविश्वास और उम्मीद के साथ बड़े हो सकें।

राज्यपाल ने शिकायत-आधारित व्यवस्था से हटकर एक निवारक बाल संरक्षण तंत्र की ओर बढ़ने का आह्वान किया। उन्होंने जोखिम संभावित बच्चों की समय रहते पहचान करने और अधिकारों के उल्लंघन को रोकने की आवश्यकता पर जोर दिया, विशेषकर बाल यौन शोषण, मानव तस्करी, बाल श्रम, नशीले पदार्थों के सेवन, विद्यालय छोड़ने, बाल विवाह और साइबर शोषण से जुड़े मामलों में। उन्होंने संकट में फंसने से पहले ही प्रभावित बच्चों की पहचान करने के लिए जिला स्तरीय निगरानी को मजबूत करने और विद्यालयों, आंगनवाड़ी केंद्रों, कानून लागू करने वाली एजेंसियां, स्वास्थ्य विभाग एवं सामुदायिक संगठनों के बीच बेहतर तालमेल बिठाने का आह्वान किया।

यौन अपराध बाल संरक्षण (पोक्सो) अधिनियम के तहत दर्ज मामलों की बढ़ती संख्या पर गंभीर चिंता व्यक्त करते हुए राज्यपाल ने मुकदमों की बेहद कम दर पर खेद जताया और ऐसे मामलों पर आगे की कार्रवाई सुनिश्चित किये जाने पर जोर दिया। उन्होंने बाल सुधार गृहों, आश्रय केंद्रों, छात्रावासों और अन्य बाल देखभाल संस्थानों के नियमित निरीक्षण को संस्थागत बनाने का भी आह्वान किया। उन्होंने किशोर न्याय अधिनियम, पोक्सो अधिनियम और शिक्षा का अधिकार अधिनियम के क्रियान्वयन की कड़ी निगरानी पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि समय-समय पर समीक्षा और स्वतंत्र मूल्यांकन से जवाबदेही मजबूत करने तथा बाल संरक्षण तंत्र की खामियों को दूर करने में मदद मिलेगी।

बच्चों के सामने आ रही सामाजिक और डिजिटल चुनौतियों का जिक्र करते हुए राज्यपाल ने राज्यव्यापी बाल अधिकार जागरूकता अभियान चलाने की वकालत की। उन्होंने बाल संरक्षण कानूनों, ऑनलाइन सुरक्षा, मानसिक स्वास्थ्य, परामर्श सेवाओं और शिकायत दर्ज कराने की व्यवस्था के प्रति जागरूकता फैलाने में शैक्षणिक संस्थानों, पंचायती राज संस्थाओं, धर्मगुरुओं, युवा संगठनों, नागरिक समाज समूहों और मीडिया को शामिल करने का सुझाव दिया।

अध्यक्ष ने मार्गदर्शन के लिए राज्यपाल का धन्यवाद किया और आश्वासन दिया कि आयोग राज्य में अधिक सुरक्षित, समावेशी और बाल-अनुकूल माहौल बनाने के लिए उनके सुझावों को लागू करने की दिशा में काम करेगा।

बैठक के दौरान एपीएससीपीसीआर के सदस्य नीरी चोंगरावजू, होनलुक लुकहम, न्गुरंग अचंग और सदस्य सचिव याकर दवे भी अध्यक्ष के साथ मौजूद थे।

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