ईटानगर , नवंबर 01 -- अरुणाचल प्रदेश के ऐतिहासिक तवांग मठ (गादेन नामग्याल ल्हात्से) में भगवान बुद्ध के पवित्र पिपराहवा अवशेष आम जनता के दर्शन के लिए रखे गए हैं, जिससे श्रद्धालुओं और आगंतुकों को बुद्ध के प्रति अपनी श्रद्धा अर्पित करने का अवसर मिल रहा है।
उल्लेखनीय है कि 13 साल बाद तवांग लौटे इन पवित्र अवशेषों के दर्शन 1 नवंबर से 7 नवंबर तक किए जा सकेंगे। मख्यमंत्री पेमा खांडू शनिवार को उद्घाटन समारोह में शामिल हुए और उन्होंने इसे श्रद्धालुओं के लिए एक दुर्लभ अवसर बताया, जहां वे प्रार्थना कर सकते हैं और इन पवित्र अवशेषों से आशीर्वाद प्राप्त कर सकते हैं। उन्होंने उम्मीद जताई कि भगवान बुद्ध की शिक्षाएं दुनियाभर में शांति, सद्भाव और करुणा की भावना को प्रेरित करती रहेंगी। इन पवित्र अवशेषों के साथ-साथ आगंतुक दो विशेष प्रदर्शनियां भी देख सकते हैं, जिनमें बौद्ध इतिहास, सभ्यता और सांस्कृतिक विरासत के विभिन्न पहलुओं को दर्शाया गया है।
अनअर्थिंग द सेक्रेड पिपरहवा: द स्टोरी ऑफ द होली बुद्धा रेलिक्स एंड देयर डिस्कवरी' (पवित्र पिपरहवा की खोज: भगवान बुद्ध के पवित्र अवशेषों और उनकी प्राप्ति की कहानी) नामक प्रदर्शनी में इन अवशेषों के पुरातात्विक इतिहास को दिखाया गया है। इसमें 1898 में हुई इनकी खोज और बौद्ध परंपरा में इनके महत्व को शामिल किया गया है। एक अन्य प्रदर्शनी 'क्रॉसरॉड्स ऑफ धम्मा: क्लासिकल लेगेसीज, लिविंग आर्ट, एंड एंथ्रोपोलॉजिकल पर्सपेक्टिव्स' (धम्म के चौराहे: शास्त्रीय विरासत, जीवंत कला और मानवशास्त्रीय दृष्टिकोण) को राष्ट्रीय राजधानी के राष्ट्रीय संग्रहालय ने कोलकाता के भारतीय संग्रहालय के सहयोग से तैयार किया है। यह प्रदर्शनी बौद्ध धर्म के ऐतिहासिक, कलात्मक और सांस्कृतिक विकास को प्रस्तुत करती है।
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