ईटानगर , सितंबर 12 -- अरुणाचल प्रदेश के राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल (सेवानिवृत्त) केटी परनाइक ने ऊपरी सुबनसिरी जिले के टाकसिंग इलाके की स्थिति के संबंध में अपनी टिप्पणियों के प्रिंट मीडिया में की गयी कुछ व्याख्याओं पर शनिवार को नाराजगी जतायी।
लोक भवन ने एक स्पष्टीकरण में कहा कि कुछ रिपोर्टों में गलत तरीके से यह दिखाया गया था कि राज्यपाल ने भारतीय क्षेत्र में किसी अतिक्रमण को स्वीकार किया है। लोक भवन ने जोर देकर कहा कि राज्यपाल ने ऐसा कोई बयान नहीं दिया था।
दो घंटे से अधिक समय तक चली बैठक में राज्यपाल ने ऑल अरुणाचल प्रदेश स्टूडेंट्स यूनियन (आप्सू) और तागिन समुदाय के प्रतिनिधियों के उठाये गये मुद्दों पर विस्तार से चर्चा की। उन्होंने संगठनों को सीमावर्ती आबादी की सुरक्षा का आश्वासन दिया और इस क्षेत्र में तैनात सेना के जवानों के उठाये जा रहे कदमों की जानकारी दी।
स्पष्टीकरण में कहा गया है कि बैठक के बाद जारी प्रेस विज्ञप्ति में केवल संगठनों के सौंपे गये ज्ञापन का उल्लेख था और इसमें किसी भी नये अतिक्रमण के दावे का समर्थन नहीं किया गया था। राज्यपाल ने स्पष्ट रूप से कहा कि टाकसिंग इलाके में कोई नया अतिक्रमण नहीं हुआ है।
वक्तव्य में कहा गया है कि उनकी टिप्पणियां सीमावर्ती क्षेत्र के संबंध में समय-समय पर सामने आने वाली सार्वजनिक चिंताओं और रिपोर्टों के संदर्भ में थीं।
लोक भवन ने ऐसे किसी भी सुझाव को 'दुर्भावनापूर्ण गलत व्याख्या' करार दिया, जिसमें यह कहा गया था कि उसने नये अतिक्रमण के दावों का समर्थन किया है या राज्यपाल रक्षा और गृह मंत्रालयों अथवा प्रधानमंत्री के समक्ष ऐसा कोई दावा उठायेंगे। राज्यपाल का रुख केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू, मुख्यमंत्री पेमा खांडू और भारतीय सेना के दिये गये बयानों के अनुरूप है, जिनमें से सभी ने अरुणाचल प्रदेश में किसी भी नये अतिक्रमण की रिपोर्टों को खारिज किया है। मुख्यमंत्री पेमा खांडू के टाकसिंग क्षेत्र में चीनी घुसपैठ की नयी रिपोर्टों को खारिज करने का भी जिक्र किया गया।
श्री खांडू ने कहा था कि भारतीय सेना इलाके में तैनात है और देश की सीमाओं की प्रभावी ढंग से रक्षा कर रही है। उन्होंने यह भी कहा था कि किसी भी दावे का स्थानीय हितधारकों और सेना के साथ स्वतंत्र रूप से सत्यापन किया जायेगा।
लोक भवन ने कहा कि राज्यपाल को भारतीय सशस्त्र बलों की सतर्कता, पेशेवर दक्षता और परिचालन तैयारियों पर पूरा विश्वास है, जो देश की एक-एक इंच जमीन की रक्षा के लिए प्रतिबद्ध हैं।
वक्तव्य में कहा गया है कि भारत सरकार ने सीमा से जुड़े मुद्दों को हल करने के लिए मजबूत व्यवस्था बनाये रखते हुए राष्ट्रीय संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता की रक्षा के अपने संकल्प को लगातार प्रदर्शित किया है।
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