ईटानगर , मई 02 -- अरुणाचल प्रदेश के उपमुख्यमंत्री चोवना मेन ने शनिवार को लोहित जिले के वाक्रो सर्कल में प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना (पीएमजीएसवाई-3) के तहत निर्मित रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण सड़क और पुल परियोजनाओं की शृंखला का उद्घाटन किया।

महिला एवं बाल विकास मंत्री दासंगलू पुल, तेजू के विधायक और सलाहकार डॉ. महेश चाई के साथ उपमुख्यमंत्री ने काहरे-तिल्लई रोड पर 193.05 मीटर लंबे 'कामफाई पुल' का उद्घाटन किया। यह पुल अब अरुणाचल प्रदेश में पीएमजीएसवाई के तहत निर्मित सबसे लंबा पुल है। इसे उन्नत 'सीमेंट ट्रीटेड बेस' (सीटीबी) तकनीक का उपयोग कर बनाया गया है। इस परियोजना से कथन बेल्ट के गांवों-तिल्लई, कंबन, तुम्बा और कथन-की कनेक्टिविटी में काफी सुधार होने की उम्मीद है। साथ ही, इससे वाक्रो तक यात्रा के समय में कमी आयेगी और क्षेत्रीय पहुंच मजबूत होगी।

उन्होंने एनएच-15 से संबलू सड़क और फाल नाले पर बने पुल का भी उद्घाटन किया। इससे उस क्षेत्र को हर मौसम में विश्वसनीय संपर्क मिल सकेगी, जो मानसून के दौरान देश से कट जाता था। इसके अतिरिक्त, मेडो-नामगो सड़क और नामगो नाले पर बने पुल को जनता को समर्पित किया गया। इससे अंतर-जिला यातायात बढ़ेगी और बाजार केंद्रों तक कृषि और चाय उत्पादों के परिवहन में सुगमता आयेगी। फाई नाले और खरायपोंग नाले पर बने पुलों सहित कई अन्य बुनियादी ढांचा परियोजनाओं का भी उद्घाटन किया गया।

इस मौके पर सभा को संबोधित करते हुए श्री मेन ने ग्रामीण यातायात को आर्थिक परिवर्तन की आधारशिला बताया। उन्होंने उल्लेख किया कि पीएमजीएसवाई ने राज्य के दूरदराज के हिस्सों में पहुंच, गतिशीलता और अवसरों को बेहतर बनाने में परिवर्तनकारी भूमिका निभायी है।

बुनियादी ढांचे के विकास की प्रगति पर विचार करते हुए उन्होंने कहा कि अरुणाचल प्रदेश सीमित सड़क निर्माण क्षमता से निकलकर अब उस दौर में पहुंच गया है, जहां आधुनिक इंजीनियरिंग पद्धतियों, सख्त गुणवत्ता नियंत्रण और मजबूत निगरानी प्रणालियों पर जोर दिया जा रहा है। उन्होंने जोर दिया कि पीएमजीएसवाई के तहत बनायी गयी सड़कों की अब कई स्तरों पर गुणवत्ता जांच की जाती है, ताकि उनका स्थायित्व और लंबे समय तक प्रदर्शन सुनिश्चित किया जा सके।

राज्य की कठिन भौगोलिक परिस्थितियों, भारी वर्षा और वाहनों के बढ़ते भार जैसी अनूठी चुनौतियों का उल्लेख करते हुए श्री मेन ने लचीले बुनियादी ढांचे और उचित रखरखाव की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने कहा, "संपर्क न केवल अंतिम गांव तक पहुंचनी चाहिए, बल्कि इसे भविष्य की जरूरतों को भी पूरा करना चाहिए। बेहतर संपर्क पहले से ही वापस गांवों की ओर जाने, कृषि विस्तार और स्थानीय उद्यमों के विकास में योगदान दे रही है।" इन विकास कार्यों का लाभ उठाने के लिए लोगों को प्रोत्साहित करते हुए उन्होंने नागरिकों से लघु उद्योगों, मूल्यवर्धन और पर्यटन आधारित आजीविका को बढ़ावा देने का आग्रह किया।

भविष्योन्मुखी दृष्टिकोण साझा करते हुए उपमुख्यमंत्री ने कहा कि सड़क संपर्क, बिजली बुनियादी ढांचा और आर्थिक विकास साथ-साथ चलने चाहिए। जल विद्युत में बड़े निवेश और भारत सरकार के निरंतर समर्थन के साथ उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि अरुणाचल प्रदेश त्वरित विकास के लिए तैयार है और उत्तर-पूर्व में विकास के प्रमुख केंद्र के रूप में उभरेगा। उन्होंने कार्यान्वयन एजेंसियों और स्थानीय समुदायों से सामूहिक जिम्मेदारी निभाने का भी आह्वान किया, ताकि गुणवत्ता मानकों को बनाये रखा जा सके और यह सुनिश्चित हो सके कि विकास का लाभ राज्य के हर कोने तक पहुंचे।

कार्यक्रम में तकनीकी सलाहकार केसी धिमोल, लोहित के उपायुक्त (डीसी) केएन डामो, अधीक्षण अभियंता (आरडब्लूडी) टी केना, पंचायत नेता और सरकारी अधिकारी उपस्थित थे।

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