ईटानगर , अप्रैल 28 -- अरूणाचल प्रदेश में राजीव गांधी विश्वविद्यालय के जूलॉजी विभाग की पीएचडी शोधार्थी ताबा जिरपू को शैक्षणिक वर्ष 2026-27 के लिए प्रतिष्ठित 'फुलब्राइट-नेहरू डॉक्टरेट रिसर्च फेलोशिप' के लिए चुना गया है।
कैंसर बायोलॉजी में विशेषज्ञता रखने वाली सुश्री जिरपू को अमेरिका के दो नामी विश्वविद्यालयों से भी ऑफर मिले हैं। संभवत: वह इस साल अगस्त के अंत तक अमेरिका में अपनी नौ महीने की पूरी तरह से वित्त पोषित रिसर्च शुरू कर देंगी। उनका शोध 'एक्स्ट्रासेलुलर वेसिकल्स' का उपयोग कर 'पैनक्रिएटिक कैंसर' के बेहतर इलाज विकसित करने पर केंद्रित है।
इस कामयाबी पर उन्हें बधाई देते हुए कार्यवाहक कुलपति प्रोफेसर एसके नायक ने कहा कि यह चयन शैक्षणिक उत्कृष्टता और अनुसंधान की प्रगति के प्रति विश्वविद्यालय की प्रतिबद्धता को दर्शाता है।
लाइफ साइंसेज फैकल्टी के डीन प्रोफेसर हुई टैग ने बताया कि सुश्री जिरपू अरुणाचल प्रदेश की मूल निवासी और 'निशी समुदाय' से ताल्लुक रखती हैं। वह पोटिन सर्कल की रहने वाली हैं और उनकी परवरिश पापुम पारे जिले के निर्जुली में हुई है। उनकी यह सफलता मिसाल है कि समर्पण से सभी बाधाओं को पार किया जा सकता है।
सुश्री जिरपू ने नयी दिल्ली स्थित गार्गी कॉलेज से स्नातक और स्नातकोत्तर राजीव गांधी विश्वविद्यालय से पूरी की है। वह फिलहाल जूलॉजी विभाग की 'मॉलिक्यूलर बायोलॉजी एंड बायोमार्कर डिस्कवरी लेबोरेटरी' में वरीय शोधार्थी हैं और डॉ. अर्नब घोष की निगरानी में पीएचडी कर रही हैं।
डॉ. घोष ने कहा कि उनकी यह उपलब्धि पूरी तरह से वाजिब है। शोध में सुश्री जिरपू की निरंतरता, कई शोध पत्रों के प्रकाशन और अंतरराष्ट्रीय सम्मेलनों में उनकी प्रस्तुतियों का हवाला दिया। उन्होंने कहा कि एक्स्ट्रासेलुलर वेसिकल्स पर शोध कैंसर के इलाज के क्षेत्र में एक उभरता हुआ और आशाजनक क्षेत्र है।
अपने विचार साझा करते हुए सुश्री जिरपू ने कहा कि यह फेलोशिप वैश्विक स्तर पर पहचान हासिल करने, प्रमुख वैज्ञानिकों के साथ काम करने और अपने शोध के नजरिये को विस्तार देने के लिए एक अनूठा मंच प्रदान करती है। उन्होंने जोर दिया कि आदिवासी पृष्ठभूमि से होने के कारण, एक्सपोजर और जागरूकता की कमी की वजह से वैश्विक शैक्षणिक जगत में अवसर अक्सर सीमित रह जाते हैं।
उन्होंने अपने चयन को न केवल व्यक्तिगत उपलब्धि बताया, बल्कि अपने समुदाय का वैश्विक स्तर पर प्रतिनिधित्व करने और दूसरों को प्रेरित करने का अवसर भी बताया। उन्होंने कहा कि आदिवासी समुदायों में कैंसर के बढ़ते मामलों को देखते हुए, उनका दीर्घकालिक लक्ष्य कैंसर अनुसंधान, विशेष रूप से 'बायोमार्कर डिस्कवरी' और दवा विकास में योगदान देना है, और शिक्षा एवं ज्ञान साझा करके अपने समुदाय का उत्थान करना है।
गौरतलब है कि सुश्री जिरपू राजीव गांधी विश्वविद्यालय और अरुणाचल प्रदेश की पहली छात्रा हैं, जिन्हें 'फुलब्राइट-नेहरू डॉक्टरेट रिसर्च फेलोशिप' मिली है। इससे पहले राज्य की सुश्री लीयी मारली नोशी (2024) और श्री मामू हेगे (2026) को युवा और मध्य-करियर पेशेवरों के लिए फुलब्राइट कार्यक्रम के तहत 'ह्यूबर्ट एच हम्फ्रे फेलोशिप' के लिए चुना गया था।
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