भीलवाड़ा , फरवरी 19 -- पर्यावरण एवं वन्यजीव संरक्षण संस्था पीपुल फॉर एनीमल्स के राजस्थान प्रदेश प्रभारी एवं पर्यावरणविद् बाबूलाल जाजू ने राज्य सरकार के बजट 2026-27 में अरावली संरक्षण के लिए 130 करोड़ रुपये के प्रावधान को ऊंट के मुंह में जीरा के समान बताते हुए अरावली के लिए एक विशेष मिशन योजना बनाये जाने की मांग की है।
श्री जाजू ने गुरुवार को कहा कि संकला फाउंडेशन की रिपोर्ट के अनुसार राजस्थान की अरावली पर्वतमाला का लगभग 25 प्रतिशत हिस्सा क्षतिग्रस्त हो चुका है तथा पिछले 48 वर्षों में 31 पहाड़ियां पूरी तरह समाप्त हो चुकी हैं। इसी गंभीर स्थिति के बीच राजस्थान सरकार ने बजट 2026-27 में अरावली संरक्षण के लिए 130 करोड़ रुपये का प्रावधान किया है जो बहुत कम और ऊंट के मुंह में जीरे के समान है।
उन्होंने कहा कि अरावली केवल पहाड़ों की श्रृंखला नहीं बल्कि राजस्थान की जीवनरेखा है। यदि अरावली समाप्त होती है तो इसका सीधा असर प्रदेश की पारिस्थितिकी, वन्यजीवन, जलस्तर और मौसम चक्र पर पड़ेगा। उन्होंने बताया कि अरावली चंबल, माही, लूणी, बनास और साबरमती जैसी प्रमुख नदियों की जननी भी है।
उन्होंने कहा कि अरावली को सबसे बड़ा नुकसान 2400 खनन लीजों और अवैध खनन से हुआ है। खनन गतिविधियों ने पहाड़ों को खोखला कर दिया है और कई क्षेत्रों में भू-जल स्तर खतरनाक स्तर तक गिर चुका है।
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