नयी दिल्ली , मार्च 10 -- पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री भूपेंद्र यादव ने मंगलवार को कहा कि केंद्र सरकार अरावली पर्वत श्रृंखला के संरक्षण के मामले में उच्चतम न्यायलय द्वारा गठित उच्चाधिकार प्राप्त समिति का स्वागत करती है और उसके साथ पूरा सहयोग करेगी।

श्री यादव ने संसद को भरोसा दिया कि गुजरात से दिल्ली तक फैली अरावली पर्वत श्रृंखला के संरक्षण के लिये सरकार प्रतिबद्ध है और 'हरित अरावली' का विशेष कार्यक्रम दो साल पहले से चलाया जा रहा है। वह राज्य सभा में अपने मंत्रालय के काम काज पर हुई आम चर्चा का जवाब दे रहे थे।

उन्होंने चर्चा के दौरान सरकार पर अरावली के मामले में उच्चतम न्यायालय के समक्ष गलत जानकारी प्रस्तुत करने के कांग्रेस के श्री नीरज डांगी के आरोपों के जवाब में कहा कि उच्चतम न्यायालय में इस समय अरावली को बचाने से जुड़े जो मामले हैं वे वास्तव में राजस्थान में अशोक गहलोत सरकार के समय अवैध खनन कराये जाने से उत्पन्न स्थिति से जुड़े हैं। इस पर कांग्रेस के सदस्यों ने काफी देर तक टोका टाकी की।

पर्यावरण मंत्री ने कहा कि वह 2012 से सदन में है और राजस्थान में अरावली क्षेत्र में अवैध खनन का मामला उन्होंने खुद उठाया था। मंत्री ने कहा कि दिल्ली, फरीदाबाद और गुड़गाव में अरावली क्षेत्र में पत्थर का खनन पहले ही बंद किया जा चुका है। उन्होंने यह भी कहा कि इस समय अरावली में खनन के जो लाइसेंस (पट्टे) चल रहे हैं उनमें से 70-80 प्रतिशत अशोक गहलोत सरकार के समय के हैं।

श्री यादव ने कहा "उच्चतम न्यायालय ने अरावली के मामले का संज्ञान उस समय लिया जब गहलोत सरकार के समय अवैध खनन हो रहे थे। हमारी सरकार अरावली के संरक्षण के लिए प्रतिबद्ध है।हमने अरावली क्षेत्र में कुंभलगढ़ को संवेदनशील पारिस्थितिकी क्षेत्र घोषित किया गया है। सरकार ने अरावली में 18 वन्यजीव अभयारण्यों का विकास किया है।"उन्होंने अरावली क्षेत्र में पहाड़ी की परिभाषा (समुद्र तल से न्यूनतम 100 मीटर की ऊंचाई ) को लेकर न्यायालय में भ्रामक जानकारी देने के संबंध में कांग्रेस के श्री डांगी के आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि पहाड़ियों के मानक भारतीय भूगर्भ सर्वेक्षण (जीएसआई) जैसी संस्थाएं करती है। उन्होंने कहा कि न्यायालय ने इस बारे में जो निर्देश दिये हैं , वैसा किया जाएगा। सरकार न्यायालय द्वारा बनायी गयी समिति के साथ पूरा सहयोग करेगी।

उन्होंने पर्यावरण और पारिस्थितिकी संरक्षण के प्रति सरकार की प्रतिबद्धता जताते हुए कहा , 'प्रकृति की रक्षा करोगे तो प्रकृति रक्षा करेगी और मोदी सरकार इस दर्शन के साथ काम कर रही है।'उन्होंने देश में संरक्षित क्षेत्रों, नगरीय वन क्षेत्रों और नगर वाटिकाओं की संख्या, रामसर आर्द्र क्षेत्र के विस्तार, हाथियों, बाघों, तेंदुओं और शेरों के संरक्षण और उनकी आबदी में वृद्धि आदि के आंकड़े देते हुए कहा , ' प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में पिछले एक दशक से अधिक समय से पूरा देश पर्यावरण संतुलन के साथ विकास की राह पर आगे बढ़ रहा है।पिछले एक दशक में पर्यावरण क्षेत्र में बड़ी उपलब्धियां हासिल की गयी हैं।'उन्होंने इलेक्ट्रानिक कचरे, ई-वाहन बैटरी के कचरे और भवनों के कचरे, ठोस कचरे के निस्तारण और पुनर्चक्रण अर्थव्यवस्था को बढ़ाने के लिए नियम कानूनों में सुधार का उल्लेख करते हुए कहा "हम पर्यावरणीय मानकों का निर्धारण करते हैं जो विकास कार्य के साथ अपनाए जाने है।"उन्होंने कहा कि सरकार ने व्यवसायों के लिए 'पर्यावरण आडिट' का नियम लागू करने का फैसला किया है ताकि उद्योग अपनी जिम्मेदारी खुद देखें।

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