काहिरा/रियाद , फरवरी 21 -- इजरायल में अमेरिका के राजदूत माइक हकाबी ने अरब लीग, मिस्र और सऊदी अरब की निंदा के बाद अपने बयान से कदम वापस खींचते हुए कहा है कि पूरे पश्चिमी एशिया पर इजरायल के कब्जे वाला उनका बयान 'अतिश्योक्ति' था।

उल्लेखनीय है कि अमेरिका के राजदूत माइक हकाबी ने कहा था कि इज़रायल को पूरे पश्चिमी एशिया पर दावा करने का "अधिकार" है। श्री हकाबी ने शुक्रवार को पत्रकार टकर कार्लसन के साथ एक साक्षात्कार में बाइबिल को आधार बनाकर कहा कि पश्चिमी एशिया में फरात नदी से लेकर नील नदी तक की जमीन 'ईश्वर ने इजरायल के लोगों को' दी है। जब श्री हकाबी से बाइबिल के संदर्भ में पूछा गया कि क्या पूरे पश्चिमी एशिया पर इजरायल का अधिकार है, तो उन्होंने कहा, "अगर वे सब कुछ ले लें, तो भी ठीक होगा।"अरब देशों की ओर से निंदा के बाद श्री हकाबी ने अपना रुख बदलते हुए कहा कि इजरायल 'सब कुछ' नहीं लेना चाहता और उनका बयान 'अतिश्योक्तिपूर्ण' था।

उल्लेखनीय है कि संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) ने एक बयान जारी कर श्री हकाबी के इस बयान की निंदा की। बयान में कहा गया कि इस पर यूएई, मिस्र, जॉर्डन, इंडोनेशिया, पाकिस्तान, तुर्की, सऊदी अरब, कतर, कुवैत, ओमान, बहरीन, लेबनान, सीरिया और फिलिस्तीन राज्य के साथ-साथ इस्लामिक सहयोग संगठन, अरब लीग और खाड़ी-सहयोग परिषद ने हस्ताक्षर किए हैं।

अरब लीग के महासचिव अहमद अबुल-गैत ने एक बयान में कहा कि श्री हकाबी की टिप्पणियां अतार्किक और अविवेकपूर्ण हैं तथा "कूटनीति के बुनियादी सिद्धांतों और स्थापित मानदंडों के अनुरूप नहीं हैं।"उन्होंने कहा कि ऐसे बयान उस समय भावनाओं को भड़काने और धार्मिक तथा राष्ट्रीय संवेदनाओं को उकसाने का काम करते हैं, जब देश गाजा में संघर्षविराम को लागू करने के तरीकों पर विचार कर रहे हैं और "शांति की दिशा में गंभीर राजनीतिक प्रक्रिया शुरू करने के अवसर को भुनाने" का प्रयास कर रहे हैं।

इस बीच, मिस्र के विदेश मंत्रालय ने शनिवार को इन टिप्पणियों पर "आश्चर्य" व्यक्त करते हुए उन्हें अंतरराष्ट्रीय कानून और संयुक्त राष्ट्र चार्टर का "खुला उल्लंघन" बताया।

मंत्रालय ने अपने बयान में दोहराया कि इज़राइल का कब्जे वाले फ़िलिस्तीनी क्षेत्रों या किसी अन्य अरब भूमि पर "कोई संप्रभुता अधिकार नहीं" है और पश्चिमी तट को हड़पने या उसे गाजा पट्टी से अलग करने के किसी भी प्रयास को "सिरे से खारिज" किया।

सऊदी अरब के विदेश मंत्री फैसल बिन फरहान अल सऊद ने भी श्री हकाबी की टिप्पणियों की निंदा करते हुए कहा कि ऐसे बयान खतरनाक मिसाल कायम करते हैं और क्षेत्र के देशों तथा अमेरिका के बीच संबंधों के प्रति उपेक्षा को दर्शाते हैं। उन्होंने एक्स पर कहा, "यह चरमपंथी बयानबाजी गंभीर परिणामों की ओर संकेत करती है और क्षेत्र के देशों एवं लोगों को उकसाकर तथा अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था की नींव को कमजोर कर अंतरराष्ट्रीय शांति और सुरक्षा के लिए खतरा पैदा करती है।"यह बात ध्यान देने योग्य है कि श्री हकाबी कब्जे वाले पश्चिमी तट को इज़रायल में मिलाने (एनेक्सेशन) के समर्थन में बार-बार बयान देते रहे हैं, जो अमेरिका की दशकों पुरानी नीति के विपरीत है। इज़रायल ने 1967 के मध्य पूर्व युद्ध के दौरान पश्चिमी तट और पूर्वी यरुशलम पर कब्जा करने के बाद से वहां लगभग 160 बस्तियां स्थापित की हैं, जिनमें करीब सात लाख यहूदी रहते हैं। फ़िलिस्तीनी इन क्षेत्रों को गाजा पट्टी के साथ अपने भविष्य के राज्य के लिए चाहते हैं। अनुमानित तौर पर लगभग 33 लाख फ़िलिस्तीनी इन बस्तियों के साथ-साथ रहते हैं।

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