नयी दिल्ली , अक्टूबर 06 -- भारत के हेड कोच वीवीएस लक्ष्मण ने एशियाई खेलों में पुरुषों के क्रिकेट में गोल्ड मेडल बचाने के बाद श्रेयस अय्यर की लीडरशिप की तारीफ़ की है। उन्होंने कप्तान को "खिलाड़ियों का कप्तान" बताया जो खुद मिसाल बनकर टीम को आगे ले जाते हैं।

शनिवार को कोरोगी स्पोर्ट्स पार्क में हुए रोमांचक फ़ाइनल में भारत ने पाकिस्तान को 19 रन से हराकर गोल्ड मेडल अपने नाम किया। अभिषेक शर्मा की 28 गेंदों में 61 रन और तिलक वर्मा की 22 गेंदों में नाबाद 51 रन की पारी की मदद से भारत ने 211/6 का स्कोर बनाया, जबकि पाकिस्तान 192/6 पर ही रुक गया। हसन नवाज़ की 51 गेंदों में 96 रन की पारी ने पाकिस्तान को मुकाबले में बनाए रखा, लेकिन शिवम दुबे ने आखिरी गेंद पर उन्हें आउट करके भारत की जीत पक्की कर दी।

लक्ष्मण के लिए, इस टूर्नामेंट की सबसे अच्छी बातों में से एक यह थी कि अय्यर ने कप्तान के तौर पर अपनी पहली बड़ी ज़िम्मेदारी को कैसे संभाला। वे अय्यर की तैयारी, रणनीतिक समझ और खिलाड़ियों के लिए सहज माहौल बनाने की क्षमता से काफ़ी प्रभावित थे।

लक्ष्मण ने बीसीसीआई के एक वीडियो में कहा, "यह उनके कप्तानी करियर की बस शुरुआत है, लेकिन मुझे यकीन है कि उन्हें बहुत सफलता मिलेगी। और वे खिलाड़ियों के कप्तान हैं। वे सभी को बहुत सहज महसूस कराते हैं और खुद मिसाल बनकर टीम का नेतृत्व करते हैं, चाहे बल्लेबाज़ी हो या मैदान पर खेल।"उन्होंने आगे कहा, "टीम मीटिंग से पहले भी, वे विरोधी टीम की ताक़त और कमज़ोरियों को ध्यान में रखकर योजना बनाते हैं। वे अपनी तैयारी में बहुत बारीकी से काम करते हैं और फ़िटनेस पर बहुत ज़ोर देते हैं।"लक्ष्मण ने अय्यर के सफल लीडरशिप करियर की उम्मीद जताते हुए खिलाड़ियों को समझने की उनकी क्षमता और टी20 क्रिकेट में विरोधी टीम से आगे रहने के उनके हुनर का भी ज़िक्र किया। उन्होंने कहा, "मुझे यकीन है कि कप्तान के तौर पर उनका करियर बहुत सफल रहेगा। वह खिलाड़ियों के शानदार लीडर हैं, रणनीति बनाने में बहुत होशियार और तेज़-तर्रार हैं। वह अपनी टीम के हर खिलाड़ी की खूबियों को समझते हैं और जानते हैं कि उनसे सबसे अच्छा प्रदर्शन कैसे करवाया जाए।"भारत के पूर्व बल्लेबाज़ ने कहा कि टीम की सफलता के पीछे एक और अहम वजह अलग-अलग हालात में ढलने की क्षमता थी, खासकर तब जब जापान में बारिश, यात्रा और प्रैक्टिस के कम मौकों की वजह से उनकी तैयारी में रुकावट आई थी।

उन्होंने कहा, "जब से हम जापान आए, हमें मौसम, यात्रा और अच्छे प्रैक्टिस सेशन व तैयारी की कमी जैसी चुनौतियों का सामना करना पड़ा। लेकिन मुझे एक बार भी ऐसा नहीं लगा कि टीम या स्क्वाड का कोई भी खिलाड़ी बड़े मैचों के लिए तैयार होने को लेकर उत्साहित नहीं था।"लक्ष्मण नॉकआउट स्टेज के दौरान अलग-अलग हालात में टीम के रवैये से भी खुश थे। उन्होंने कहा, "और एक बात जिस पर मुझे वाकई गर्व है, वह है हालात के हिसाब से ढलने की उनकी क्षमता। क्योंकि मुश्किल हालात या परिस्थितियों के बावजूद, दोनों मैचों में उनके खेलने के तरीके में कभी भी कोई कमी नहीं दिखी। हम जानते हैं कि सेमीफ़ाइनल मुश्किल पिच पर खेला गया था, लेकिन उन्होंने पॉज़िटिव सोच दिखाई, और फ़ाइनल में भी बल्ले और गेंद से उन्होंने बहुत प्रोफेशनल खेल दिखाया।"उन्होंने भारी बारिश के बावजूद नॉकआउट मैच करवाने के लिए आयोजकों की तारीफ़ की और कहा कि यह कैंपेन भारत के पाथवे प्रोग्राम के ज़रिए तैयार हो रही मज़बूती को दिखाता है।

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