अम्बाला , मई 03 -- हरियाणा में अम्बाला नगर निगम आम चुनाव-2026 के बीच एक कानूनी विवाद ने चुनावी माहौल गरमा दिया है।

एक लाख 98 हजार से अधिक मतदाताओं वाले इस चुनाव में 20 वार्डों से मैदान में उतरे 65 उम्मीदवारों पर मतदाताओं को गुमराह करने का आरोप लगा है।

पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय के अधिवक्ता हेमंत कुमार ने राज्य निर्वाचन आयोग और जिला प्रशासन को भेजे ज्ञापन में कहा है कि उम्मीदवार खुद को 'पार्षद' पद का प्रत्याशी बता रहे हैं, जबकि हरियाणा में कानूनन यह पद अस्तित्व में ही नहीं है। हरियाणा नगर निगम अधिनियम 1994 और हरियाणा नगरपालिका अधिनियम 1973 तथा इनके तहत बनी निर्वाचन नियमावली में पार्षद' शब्द का कहीं उल्लेख नहीं है।

ज्ञापन के अनुसार, भारतीय जनता पार्टी (भाजपा), कांग्रेस, आम आदमी पार्टी और निर्दलीय सभी दलों के उम्मीदवार पोस्टर, बैनर, पम्फलेट और फ्लेक्स पर खुद को 'पार्षद प्रत्याशी' बता रहे हैं।

अधिवक्ता ने आरोप लगाया कि सभी 20 वार्डों में उम्मीदवार संगठित रूप से गलत पदनाम का इस्तेमाल कर रहे हैं, जिससे मतदाताओं में भ्रम की स्थिति बन रही है। यह चुनावी पारदर्शिता और कानूनी शुचिता पर सवाल है।

ज्ञापन में 13 अप्रैल के चुनाव कार्यक्रम अधिसूचना, 15 अप्रैल के चुनाव नोटिस, नामांकन पत्र और उम्मीदवारों के हलफनामे का हवाला देते हुए कहा गया है कि इन सभी में केवल सदस्य' शब्द का प्रयोग हुआ है। वहीं, 13 मई को मतगणना के बाद मिलने वाले चुनाव प्रमाण पत्र , गजट अधिसूचना और शपथ ग्रहण में भी 'सदस्य' पदनाम ही रहेगा।

श्री कुमार ने कहा कि पंजाब, दिल्ली, चंडीगढ़ और उत्तर प्रदेश में 'पार्षद' शब्द कानून में मान्य है, लेकिन हरियाणा में नहीं। उन्होंने निर्वाचन आयोग से तुरंत संज्ञान लेकर उम्मीदवारों को सही पदनाम इस्तेमाल करने का निर्देश देने और भ्रामक प्रचार पर कार्रवाई की मांग की है।

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