बेंगलुरु , मई 25 -- कर्नाटक में रक्षा विशेषज्ञ गुरचरणजीत सिंह ने कहा कि ईरान और अमेरिका के बीच चल रहे टकराव में जल्द कोई बड़ी सफलता मिलने की उम्मीद नहीं है क्योंकि दोनों पक्ष अभी अमेरिकी मध्यावधि चुनाव से पहले लगातार दबाव बनाने की रणनीति में लगे हुए हैं।

उन्होंने ईरान के यूरेनियम संवर्धन कार्यक्रम को इस विवाद का मुख्य मुद्दा बताते हुए कहा कि यह तेहरान की रणनीतिक पहचान और इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (आईआरजीसी) के प्रभाव से गहराई से जुड़ा हुआ है।

श्री सिंह ने यूनीवार्ता को बताया, "ईरान के संवर्धन पर अपनी स्थिति कमजोर करने की उम्मीद नहीं है क्योंकि इसे राष्ट्रीय गौरव और सुरक्षा नीति का एक मुख्य हिस्सा माना जाता है।"श्री सिंह ने कहा कि अमेरिका इस मुद्दे को राजनीतिक ताकत और रोकथाम के नजरिए से देखना जारी रखे हुए है और मैसेजिंग काफी हद तक घरेलू राजनीतिक बातों से तय होती है। उन्होंने कहा कि अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के संभावित समझौते पर सार्वजनिक बयानों में ठोस कूटनीतिक प्रगति की बजाय उम्मीद और रणनीतिक संकेत दिखता है।

श्री सिंह के अनुसार श्री ट्रंप का दृष्टिकोण एक जैसा नहीं लगता। वे गुस्से वाली बातों और बातचीत के संकेतों के बीच बदलते रहते हैं, जबकि इलाके की जमीनी हकीकत काफी हद तक वैसी ही है। उन्होंने कहा कि इससे कूटनीतिक माहौल में अनिश्चितता बढ़ती है और बातचीत की असली दिशा के बारे में स्पष्टता कम होती है।

उन्होंने कहा कि ईरान और अमेरिका अभी तुरंत कोई समझौता करने की बजाय अधिक से अधिक लाभ उठाने पर ध्यान केंद्रित कर रहे हैं। उनके हिसाब से इससे एक अस्थायी संतुलन बना है जहां तनाव काबू में है लेकिन समाधान में भी देरी हो रही है।

उन्होंने कहा कि जबकि सार्वजनिक बयानों में संभावित समझौते के बारे में उम्मीद जताई जा रही है, दोनों देशों की अंदरूनी रणनीतिक स्थिति वैसी ही हैं, जिससे जल्द ही कोई बड़ी सफलता मिलने की उम्मीद कम है।

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