वॉशिंगटन , फरवरी 24 -- अमेरिकी सांसदों की ओर से व्हाइट हाउस को सौंपी गई एक रिपोर्ट में नाइजीरिया को दुनिया में ईसाइयों के लिए सबसे घातक देश बताया गया है। रिपोर्ट में दशकों से ईसाई समुदायों पर हो रहे हिंसक हमलों को लेकर गंभीर चिंता जतायी गयी है।
यह रिपोर्ट कांग्रेसमैन रिले मूर और प्रतिनिधि सभा की विनियोग संबंधी समिति तथा विदेश मामलों की समिति द्वारा तैयार की गई है। इसमें आरोप लगाया गया है कि सशस्त्र फुलानी मिलिशिया और आतंकी संगठनों ने हजारों ईसाइयों-जिनमें पादरी और चर्च से जुड़े लोग शामिल हैं-की हत्या की है और हजारों चर्चों और स्कूलों को नष्ट किया है।
रिपोर्ट में कहा गया है कि नाइजीरिया में ईसाई होना अत्यंत जोखिम भरा है। समिति ने पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा नाइजीरिया को 'कंट्री ऑफ पर्टिकुलर कंसर्न' (सीपीसी) के रूप में पुनः नामित किए जाने के कदम की सराहना की, जिससे दोषियों को जवाबदेह ठहराने और नाइजीरियाई सरकार पर संवेदनशील समुदायों की सुरक्षा के लिए दबाव बनाने का प्रयास किया जा सके।
रिपोर्ट में अमेरिका और नाइजीरिया के बीच द्विपक्षीय समझौते की आवश्यकता पर जोर दिया गया है, जिसका उद्देश्य ईसाई समुदायों की सुरक्षा, आतंकवाद-रोधी सहयोग का विस्तार और आर्थिक और सुरक्षा साझेदारी को मजबूत करना है। इसके साथ ही, मानवीय सहायता के सह-वित्तपोषण, नाइजीरियाई सुरक्षा बलों को सुदृढ़ करने, फुलानी मिलिशिया के निरस्त्रीकरण कार्यक्रम लागू करने और दोषियों पर प्रतिबंध लगाने की सिफारिश की गई है।
रिपोर्ट में ईशनिंदा कानूनों को निरस्त करने और सांप्रदायिक हिंसा से निपटने के लिए अंतरराष्ट्रीय साझेदारों को शामिल करने की भी बात कही गई है। कांग्रेस नेताओं ने कहा कि अमेरिका धार्मिक उत्पीड़न को नजरअंदाज नहीं करेगा और धार्मिक स्वतंत्रता की रक्षा के लिए ठोस कदम उठाएगा।
रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि हालांकि नाइजीरिया अमेरिका का एक महत्वपूर्ण साझेदार है, लेकिन वहां की सरकार को हिंसा समाप्त करने के लिए राजनीतिक इच्छाशक्ति दिखानी होगी और आवश्यक वित्तीय संसाधन आवंटित करने होंगे।
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