जयंत रॉय चौधरीनयी दिल्ली , फरवरी 21 -- अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के आपातकालीन सीमा शुल्क अधिकार पर रोक लगाने वाली अमेरिका की सुप्रीम कोर्ट के फैसले से भारतीय सामानों पर आयात शुल्क कम हो सकता है और यह वस्त्र और औषधीय पदार्थों जैसे क्षेत्रों में निर्यात 10 से 13.5 प्रतिशत तक जा सकता है। इसके साथ ही दोनों देशों के बीच अंतरिम व्यापारिक समझौते की शर्तों में भी बदलाव आ सकता है।
इस फैसले के कुछ ही घंटों के अंदर जिसने अंतरराष्ट्रीय आपातकालीन आर्थिक शक्तियां अधिनियम (आईईईपीए) के तहत लगाए गए अमेरिका के अधिकतर बड़े 'पारस्परिक' शुल्क को खत्म कर दिया, श्री ट्रंप ने व्यापारिक अधिनियम की धारा 122 के तहत एक नए 10 प्रतिशत आधारभूत वैश्विक शुल्क का ऐलान किया, जो बातचीत जारी रहने तक भारत सहित व्यापारिक साझेदारों पर कुछ समय के लिए लागू होगा।
आर्थिक विश्लेषकों का मानना है कि इससे अमेरिका को किए जाने वाले भारतीय निर्यात में कुछ समय के लिए बढ़ोतरी होगी, जो अमेरिकी सरकार के आंकड़ों के मुताबिक 2025 में 103.82 बिलियन अमेरिकी डॉलर था। पिछले पांच सालों में अमेरिका को भारत का निर्यात दोगुना हो गया है, जिससे भारत के पक्ष में व्यापारिक संतुलन बढ़ गया है।
आईईईपीए आधारित शुल्क खत्म होने के साथ वाणिज्य मंत्रालय के अधिकारियों ने नाम न बताने की शर्त पर कहा कि 18 प्रतिशत पारस्परिक दर का कानूनी आधार कमजोर हो गया है। विश्लेषकों ने कहा कि इसकी बजाय भारत को कई सामानों पर अमेरिका के सर्वाधिक तरजीह प्राप्त राष्ट्र (एमएफएन) दर लगभग 3.5 प्रतिशत के ऊपर हाल ही में घोषित 10 प्रतिशत वैश्विक शुल्क का सामना करना पड़ सकता है, जिसका मतलब है कि प्रभावी दर लगभग 13.5 प्रतिशत होगी, जब तक कि मध्यस्थ शर्तों में बदलाव नहीं करते।
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