नयी दिल्ली , मई 13 -- केंद्रीय संस्कृति एवं पर्यटन मंत्री गजेन्द्र सिंह शेखावत ने बुधवार को कहा कि अमेरिका से भारत की पवित्र प्राचीन मूर्तियों की वापसी देश की सभ्यतागत स्मृति की पुनर्स्थापना का प्रतीक है।
श्री शेखावत ने आज यहां संवाददाता सम्मेलन में कहा कि अमेरिका के स्मिथसोनियन के एशियाई कला के राष्ट्रीय संग्रहालय से तीन ऐतिहासिक कांस्य प्रतिमाओं की वापसी भारत के लिए बड़ी उपलब्धि है। यह कदम चोरी हुई सांस्कृतिक धरोहरों को वापस लाने और वैश्विक स्तर पर नैतिक संग्रहालय व्यवस्था को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण मील का पत्थर है।
उन्होंने बताया कि वापस लाई गई प्रतिमाओं में चोल काल की लगभग 990 ईसवी की शिव नटराज प्रतिमा, 12वीं शताब्दी की सोमस्कंद (शिव और उमा) प्रतिमा तथा 16वीं शताब्दी की विजयनगर कालीन संत सुंदरार और परवई की प्रतिमा शामिल हैं। ये सभी प्रतिमाएं मूल रूप से तमिलनाडु के मंदिरों से संबंधित हैं और 20वीं शताब्दी के मध्य में अवैध रूप से भारत से बाहर ले जाई गई थीं।
केंद्रीय मंत्री ने कहा कि ये प्राचीन मूर्तियां केवल कलात्मक धरोहर नहीं, बल्कि भारत की आध्यात्मिक परंपराओं, ऐतिहासिक निरंतरता और सांस्कृतिक पहचान का प्रतीक हैं। पुरातन वस्तुओं की अवैध तस्करी ने दशकों तक भारत को उसकी अमूल्य धरोहरों से वंचित रखा।
श्री शेखावत ने बताया कि वर्ष 2014 से अब तक भारत विभिन्न देशों से 666 प्राचीन वस्तुएं वापस ला चुका है। इनमें से अधिकांश वस्तुएं संस्कृति मंत्रालय, एएसआई, भारतीय दूतावासों और अंतरराष्ट्रीय एजेंसियों के संयुक्त प्रयासों से वापस लाई गई हैं। उन्होंने यह भी कहा कि हाल ही में भारतीय मूल की 657 कला वस्तुएं अमेरिकी कानून प्रवर्तन एजेंसियों द्वारा भारतीय दूतावास को सौंपी गई हैं, जिनके सत्यापन और परिवहन की प्रक्रिया जारी है।
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