वाशिंगटन , अगस्त 26 -- अमेरिका के विभिन्न प्रांत और शहर ट्रंप प्रशासन की उस कोशिश को चुनौती दे रहे हैं, जिसमें स्थानीय सरकारों को नये चुनाव नियम अपनाने तक पुलिस, आपातकालीन प्रतिक्रिया और आतंकवाद-रोधी कार्यों के लिए मिलने वाली लाखों डॉलर की धनराशि रोकने की कोशिश की जा रही है।

एक्सियोस की रिपोर्ट के अनुसार, इस मामले में राज्य और स्थानीय सरकारों की ओर से मुकदमे भी दायर किए जा चुके हैं। राज्य और स्थानीय सरकारों का आरोप है कि ट्रंप प्रशासन सार्वजनिक सुरक्षा के लिए मिलने वाली धनराशि का इस्तेमाल उन चुनाव नीतियों को अपनाने के लिए दबाव बनाने में कर रहा है, जिन्हें अमेरिकी कांग्रेस ने मंजूरी नहीं दी है। टेक्सास का हैरिस काउंटी (जिसमें ह्यूस्टन शहर भी शामिल है) उन स्थानीय निकायों में शामिल है, जिन्होंने गृह सुरक्षा विभाग (डीएचएस) के खिलाफ मुकदमा दायर किया है।

काउंटी अटॉर्नी एबी कामिन ने कहा कि प्रशासन सार्वजनिक सुरक्षा और आतंकवाद-रोधी व्यवस्था के लिए मिलने वाली धनराशि बंद करने की धमकी देकर वास्तव में स्थानीय सरकारों पर दबाव डाल रहा है। जिन चुनावी उपायों को लेकर विवाद है, उनमें कागजी मतपत्रों की व्यवस्था अपनाना, मतदाता के अमेरिकी नागरिक होने का प्रमाण अनिवार्य करना और पांच प्रतिशत मतपत्रों की गिनती हाथ से करना शामिल है।

हैरिस काउंटी ने ओहायो के कोलंबस, टेनेसी के नैशविल और टेक्सास के एल पासो काउंटी के साथ मिलकर डीएचएस की उस कोशिश को चुनौती दी है, जिसमें अनुदान की राशि रोकने की बात कही गयी है।

स्थानीय अधिकारियों का कहना है कि इन धनराशियों से आतंकवाद-रोधी दलों को सहायता मिलती है और ड्रोन तथा बम की धमकियों से निपटने के लिए उपकरण, सुरक्षा सामग्री और कर्मचारियों के अतिरिक्त काम के भुगतान की व्यवस्था होती है।

श्री कामिन ने कहा कि इन क्षेत्रों में सभी राजनीतिक विचारों से जुड़े समर्पित सरकारी कर्मचारी यह सुनिश्चित करने के लिए काम कर रहे हैं कि चुनाव सुरक्षित और निष्पक्ष तरीके से कराये जायें। उन्होंने प्रशासन पर आरोप लगाया कि वह राजनीतिक दलगत हितों के लिए सार्वजनिक सुरक्षा की धनराशि को खतरे में डाल रहा है और आतंकवाद-रोधी धनराशि रोक रहा है।

वहीं, प्रशासन ने कहा है कि चुनावों की निष्पक्षता और विश्वसनीयता की रक्षा के लिए ये उपाय जरूरी हैं। जुलाई में गृह सुरक्षा मंत्री मार्कवेन मुलिन ने कहा था कि संघीय सरकार उन राज्यों को धन नहीं देगी, जो अपने चुनावों को कराने से इनकार करेंगे।

फेमा के एक प्रवक्ता ने इस नीति का बचाव करते हुए कहा, "चुनाव की सुरक्षा राष्ट्रीय सुरक्षा है।" उन्होंने कहा कि इन उपायों का विरोध होना तय था, क्योंकि इन्हें चुनावों और अमेरिकी लोकतंत्र की विश्वसनीयता की रक्षा करने के लिए तैयार किया गया है।

धनराशि को लेकर यह विवाद ऐसे समय में सामने आया है, जब अमेरिका राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को चुनाव व्यवस्था को प्रभावित करने की उनकी कोशिशों को लेकर कई कानूनी चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है। इस गर्मी की शुरुआत में डेमोक्रेटिक पार्टी के नेतृत्व वाले 25 से अधिक राज्यों ने चुनाव प्रक्रिया में बदलाव की उनकी मांगों को लेकर ट्रंप प्रशासन के खिलाफ मुकदमा दायर किया था।

उच्चतम न्यायालय ने अलग मामले में सोमवार को प्रशासन को डाक से मतदान से जुड़े एक कार्यकारी आदेश के कुछ हिस्सों को लागू करने की अनुमति दे दी। राज्य और स्थानीय अधिकारियों का कहना है कि चुनाव कराना, जिसमें मतदाता सूची को बनाए रखना, मतपत्र से जुड़ी प्रक्रियाएं और चुनावों की जांच शामिल है, संविधान के तहत मुख्य रूप से राज्यों की जिम्मेदारी है।

एल पासो काउंटी की अटॉर्नी क्रिस्टीना सांचेज ने कहा कि प्रशासन की मांगें "इस गलत धारणा को और मजबूत करती हैं कि हमारे चुनाव सुरक्षित नहीं हैं।" सांचेज ने कहा कि केवल उनके काउंटी में कागजी मतपत्रों की व्यवस्था लागू करने पर करीब 30 लाख डॉलर का खर्च आयेगा। इसका आर्थिक असर सीधे सार्वजनिक सुरक्षा पर भी पड़ सकता है।

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