वाशिंगटन , जुलाई 14 -- अमेरिका की सेना ने ईरान के खिलाफ जारी युद्ध में पहली बार वन-वे 'समुद्री ड्रोन' या मानवरहित सतही जहाजों (यूएसवी) के इस्तेमाल किया है। अमेरिका और ईरान के बीच चौथे दिन भी जारी इस लड़ाई में अमेरिकी ड्रोन ने ईरान के 'बंदर अब्बास' नौसैनिक बेस को निशाना बनाया।अमेरिकी सेंट्रल कमांड (सेंटकॉम) के अनुसार, रविवार को तीन मानवरहित जहाजों ने बंदर अब्बास नौसैनिक बेस पर सीधे हमले किए। सेंटकॉम ने कहा, "तीन 'कोर्सेर' यूएवी ने बंदर अब्बास बंदरगाह पर हमला किया। यह पहला मौका है जब अमेरिकी सेना ने युद्ध के मैदान में समुद्री ड्रोन का इस्तेमाल किया है।"अमेरिकी सेना ने इस हमले का एक वीडियो भी जारी किया है। इसमें इन जहाजों को एक शिपयार्ड में मरम्मत के लिए खड़ी पनडुब्बी से टकराते हुए दिखाया गया है।

टेक्सास की कंपनी 'सरोनिक टेक्नोलॉजीज' ने सोशल मीडिया पर पुष्टि की है कि ये उनके ही 'कोर्सेर' मॉडल के ड्रोन थे। कंपनी के मुताबिक, 24 फीट (7.3 मीटर) लंबे इस ड्रोन की रफ्तार करीब 40 मील प्रति घंटा (64 किमी/घंटा) है और यह 1,000 मील (1,600 किमी) से ज्यादा दूरी तक मार कर सकता है।

कंपनी ने यह भी बताया कि जून में फारस की खाड़ी में एक ईरानी ड्रोन हमले के बाद अमेरिकी सेना का अपाचे हेलीकॉप्टर गिर गया था, तब उसके पायलटों को बचाने में भी इसी कोर्सेर ड्रोन की मदद ली गई थी।

दूसरी ओर, ईरान की अर्ध-सरकारी समाचार एजेंसी 'फार्स' के अनुसार, ईरान के इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (आईआरजीसी) ने मंगलवार तड़के दावा किया कि उसने बहरीन में अमेरिकी समुद्री ड्रोनों के कंट्रोल सेंटर को तबाह कर दिया है।

गौरतलब है कि रूस और यूक्रेन के युद्ध में भी ये समुद्री ड्रोन एक बड़े हथियार के रूप में उभरे हैं, जहां यूक्रेन ने रूस के ब्लैक सी फ्लीट पर इनसे बड़े हमले किए हैं। 'कार्नेगी मेलन पॉलिसी एंड लॉ रिव्यू' की फरवरी की एक रिपोर्ट के अनुसार, यूक्रेनी नौसैनिक ड्रोनों ने पिछले तीन सालों में रूस के 19 जहाजों को या तो डुबो दिया या उन्हें भारी नुकसान पहुंचाया है।

दोनों देशों (अमेरिका-ईरान) के बीच यह ताजा विवाद एक नाजुक युद्धविराम के टूटने के बाद शुरू हुआ है। अमेरिका ने 11 जुलाई को बताया कि उसने एक हफ्ते में तीन बार हमले किये। सेंटकॉम ने भी आईआरजीसी पर हॉर्मुज़ जलडमरूमध्य से गुजर रहे एक कंटेनर जहाज पर हमला करने का आरोप लगाया और जवाब में ईरान के 140 सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया।

अमेरिकी हमले के जवाब में ईरान ने भी खाड़ी क्षेत्र में अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर मिसाइल और ड्रोन दागे। हालांकि खाड़ी देशों ने इन हमलों को नाकाम करने का दावा किया है।

इसी बीच 12 जुलाई को भारत ने बताया कि हॉर्मुज़ जलडमरूमध्य में एक व्यापारिक जहाज पर ईरान के हमले के बाद से उसका एक नागरिक लापता है।

इस रणनीतिक समुद्री मार्ग को लेकर वाशिंगटन और तेहरान के अपने-अपने दावे हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प और सेंटकॉम का कहना है कि यह मार्ग खुला हुआ है, जबकि ईरानी अधिकारियों के मुताबिक अब यहाँ से व्यापारिक जहाजों का गुजरना मुमकिन नहीं है।

अमेरिका ने बाद में कहा कि उसने ईरानी सैन्य ठिकानों के खिलाफ अतिरिक्त हमले किए, जबकि ईरान ने देश के दक्षिणी हिस्सों में विस्फोटों की सूचना दी, जिसमें एक पंपिंग स्टेशन भी शामिल है जहां एक व्यक्ति की मौत हो गई।

ईरान ने यह भी दावा किया कि उसने इस क्षेत्र में अमेरिकी ठिकानों पर मिसाइलों और ड्रोनों से ताबड़तोड़ हमले किए हैं, जिनमें कुवैत और बहरीन के सैन्य ठिकाने भी शामिल हैं।

इधर, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प की इस कड़ी चेतावनी के बाद कि 'अमेरिका बहुत करारा जवाब देगा', अमेरिकी सेना ने 13 जुलाई को लगातार तीसरी रात पूरे ईरान में हवाई हमले किए। इसके बाद ईरानी मीडिया ने बंदर अब्बास शहर के साथ-साथ कीश, क़ेश्म और अबू मूसा द्वीपों पर भारी धमाकों की खबर दी।

अमेरिकी सेना ने यह भी साफ कर दिया है कि वह मंगलवार दोपहर से ईरानी बंदरगाहों की नौसैनिक नाकेबंदी फिर से शुरू कर देगा। इसके साथ ही श्री ट्रम्प ने ईरानी बंदरगाहों से जुड़े हर तरह के माल पर 20 प्रतिशत शुल्क लगाने की घोषणा की है।

श्री ट्रम्प ने सोमवार को कहा कि हॉर्मुज़ पर अमेरिकी नौसेना की नाकेबंदी को दोबारा लागू किया जा रहा है। उन्होंने अपने सोशल मीडिया मंच 'ट्रुथ सोशल' पर लिखा, "हॉर्मुज़ जलडमरूमध्य खुला है और खुला ही रहेगा-चाहे ईरान चाहे या न चाहे। हम 'ईरानी नाकेबंदी' को फिर से लागू कर रहे हैं, जिसका नाम ही इसलिए रखा गया है क्योंकि यह केवल ईरानी जहाजों या उनके खरीदारों को आने-जाने से रोकेगी।"इसी बीच संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) ने जानकारी दी कि ईरानी मिसाइलों ने हॉर्मुज़ जलडमरूमध्य में दो तेल टैंकरों पर हमला किया, जिसमें चालक दल के एक सदस्य की मौत हो गई। इसके अलावा, ईरान ने बहरीन की तरफ भी मिसाइलों और ड्रोनों से कई हमले किए।

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