नयी दिल्ली , फरवरी 03 -- वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने अमेरिका के साथ व्यापार समझौते को कपड़ा, चमड़ा, रत्न-आभषण और हस्तशिल्प जैसे रोजगारपरक क्षेत्रों के लिए 'ढेर सारे अवसर' खोलने वाला बताते हुए मंगलवार को कहा कि भारत ने दुनिया के सबसे बड़े बाजार के साथ जो समझौता हासिल किया है वह उसके साथ 'हमारे पड़ोसी और प्रतिस्पर्धी देशों के समझौतों की तुलना में बहुत अच्छा है।"इस समझौते का श्रेय प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व और राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के साथ उनकी मित्रता को देते हुए वाणिज्य मंत्री ने कहा कि अब दोनों ओर के अधिकारी समझौते के तकनीकी विवरणों को अंतिम रूप देंगे। ब्योरा तय हो जाने पर दोनों पक्ष एक संयुक्त बयान जारी करेंगे। उन्होंने विश्वास जताया कि संयुक्त बयान जल्द ही जारी किया जा सकेगा।
श्री मोदी और राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंम के बीच सोमवार रात फोन वार्ता के बाद घोषित इस समझौते को लेकर मंगलवार शाम मीडिया के सामने एक वक्त में श्री गोयल ने कहा कि इसमें "कृषि एवं पशुपालन जैसे क्षेत्रों में देश के संवेदनशील हितों की पूरी तरह रक्षा की गयी है।" उन्होंने कहा कि उन्हें मिल रही रिपोर्टों के अनुसार इस समझौते को लेकर देश भर में हर क्षेत्र में उल्लास है।
श्री गोयल ने कहा, "कांग्रेस के नेता राहुल गांधी इस समझौते को लेकर निराधार झूठ फैलाने में लग गये और देश के लोगों को गुमराह कर रहे हैं।" उन्होंने कहा कि जहां इससे भारत के निर्यात क्षेत्र के लिए बड़े अवसर खुलने जा रहे हैं। वहीं, दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ रही अर्थव्यवस्था की बढ़ती जरूरतों के लिए डाटा सेंटर, सेमीकंडक्टर, एआई जैसे उच्च प्रौद्योगिकी के क्षेत्रों के लिए उपकरण और कोकिंग कोल तथा अन्य जरूरी कच्चे माल की आपूर्ति में सुविधा होगी।
उन्होंने स्पष्ट किया कि अमेरिकी राष्ट्रपति ने भारत के 500 अरब डॉलर के जिस आयात की बात की है वह पांच साल के संदर्भ में है। उन्होंने समझौते की घोषणा पहले श्री ट्रम्प की ओर से किये जाने के बारे में कहा, "भारत पर 50 प्रतिशत का शुल्क अमेरिका ने लगाया था, इसे कम करने की घोषणा उन्हें ही करनी थी।"श्री गोयल ने विपक्ष की आलोचना करते हुए कहा, "हम इस समझौते के बारे में यह बयान संसद में देना चाहते थे, लेकिन आज वहां विपक्ष के नेता राहुल गांधी के नेतृत्व में कांग्रेस, द्रमुक, तृणमूल कांग्रेस, समाजवादी पार्टी और इंडी गठबंधन के दलों ने जो भद्दा दृश्य उत्पन्न किया वह घोर निंदनीय है। इसी कारण हम इस वक्तव्य के लिए यहां (मीडिया के समक्ष) आये हैं।" इस अवसर पर श्री गोयल के साथ वाणिज्य राज्य मंत्री जितिन प्रसाद और वाणिज्य सचिव राजेश अग्रवाल भी थे।
श्री गोयल ने इस वक्तव्य पर मीडिया का कोई सवाल नहीं लिया।
वाणिज्य मंत्री ने कहा, "प्रधानमंत्री मोदी के श्री ट्रम्प के साथ आत्मीय संबंध हैं। यह डील (समझौता) अमेरिका के साथ हमारे सभी पड़ोसियों और प्रतिस्पर्धी देशों के साथ हुए समझौते से बेहतर है। ...यह हमारी अर्थव्यवस्था के लिए शुभ संकेत है।"उन्होंने कहा कि विभिन्न जटिल विषयों और समस्याओं को सुलझाने के लिए महीनों तक चली बातचीत के बाद यह समझौता श्री मोदी के नेतृत्व के चलते संभव हो सका है। उन्होंने कहा कि अमेरिकी बाजार में 50 प्रतिशत के ऊंचे शुल्क के चलते हमारे किसान, मछुआरे, कपड़ा और परिधान बनाने वाले दिक्कत में आ गये थे।
उन्होंने कांग्रेस पर दोहरा चरित्र दिखाने का आरोप लगाते हुए कहा, "वे अभी कुछ दिन पहले तक पूछ रहे थे कि अमेरिका के साथ समझौता कब तक होगा, अब वे इस समझौते के बारे में निराधार बातें करके जनता को भ्रमित कर रहे हैं।" उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री भारत के किसानों, पशुपालकों, मछुआरों और अन्य संवेदनशील क्षेत्रों के हितों के साथ कभी समझौता नहीं करेंगे।
श्री गोयल ने कहा कि प्रधानमंत्री ने कहा, "कांग्रेस ने 2011-12 में भारत को चीन के साथ मुक्त व्यापार समझौते के चक्कर में फंसा दिया था। श्री मोदी ने ही अपने किसानों, पशुपालकों की अपनी लगातार चिंताओं के चलते, उनके हितों की रक्षा के लिए क्षेत्रीय वृहद आर्थिक भागीदारी (आरसीईपी) समझौते से भारत को अलग कर लिया।" उन्होंने दोहराया कि अमेरिका के साथ हुए समझौते में संवेदनीशल क्षेत्रों का संरक्षण किया गया है।
उन्होंने श्री गांधी पर नकारात्मक सोच रखने का आरोप लगाते हुए कहा, "(लोकसभा में) विपक्ष के नेता देश को झूठ और फरेब के नाम पर भ्रमित करना चाह हरे हैं। उन्हें देश के विकास में कोई दिलचस्पी नहीं है। संप्रग के कार्यकाल में विकास रुक गया था, देश पांच प्रमुख कमजोर (फ्रेजाइल फाइव) अर्थव्यवस्थाओं में गिना जाने लगा था, महंगाई चरम पर थी। क्या वह चाहते हैं कि भारत एक बार फिर उसी दौर में पहुंच जाए?"उन्होंने कहा कि सरकार डाटा सेंटर, आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस (एआई), भविष्य की डिजिटल अर्थव्यवस्था में लाखों करोड़ का निवेश आकर्षित करना चाहती है। इसके लिए उच्च प्रौद्योगिकी उपकरणों की जरूरत होगी।
श्री गोयल ने कहा कि यह समझौता भारत की भविष्य की जरूरतों के लिए सहायक होगा और इससे देश की आर्थिक वृद्धि को बड़ा बल मिलेगा। लेकिन विपक्ष राजनीतिक अराजकता पैदा करना चाहता है। उन्होंने कहा कि जनता कांग्रेस और उसके सहयोगियों से जवाब मांगेगी और उन्हें फिर नकारेगी।
वाणिज्य मंत्रालय के अधिकारियों ने कहा कि भारत डाटा सेंटर का वैश्विक केंद्र बनने जा रहा है। इसके लिए सैकड़ों अरब डॉलर के अत्याधुनिक उपकरण और प्रौद्योगिकी की जरूरत होगी। इसके लिए ऊर्जा की जरूरत को पूरा करने के लिए परमाणु ऊर्जा की क्षमता का भी विस्तार करना होगा। अमेरिका के साथ समझौता इस दिशा में बहुत सहायक हो सकता है।
एक अन्य अधिकारी ने कहा कि यदि हम अकेले इस्पात क्षेत्र में 2030-31 तक 30 करोड़ टन इस्पात उत्पादन क्षमता हासिल करना चाहते हैं तो हमें सालाना 15 अरब डॉलर के कोकिंग कोल के आयात की जरूरत पड़ सकती है। मंत्रालय के अधिकारियों ने कहा कि नया समझौता भारत और अमेरिका के बीच 500 अरब डॉलर के सालाना द्विपक्षीय व्यापार के लक्ष्यों के विस्तार में सहायक होगा। ऐसे में पांच साल में वहां से 500 अरब डॉलर का आयात कोई ऐसी बात नहीं है जिस पर आश्चर्य किया जाए।
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