नयी दिल्ली , मार्च 05 -- आम आदमी पार्टी ने अमेरिका-ईरान के बीच चल रहे युद्ध को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की चुप्पी पर सवाल खड़ा करते हुये कहा कि यह देश के लिए खतरनाक संकेत है।

आम आदमी पार्टी के वरिष्ठ नेता और पंजाब प्रभारी मनीष सिसोदिया ने आज कहा कि प्रधानमंत्री की यह चुप्पी भारत के लिए खतरनाक संकेत है। अमेरिका इस युद्ध की तैयारी कई महीने से कर रहा था। उसे पता था कि युद्ध शुरू होने के बाद तेल की आपूर्ति प्रभावित हो सकती है फिर भी अमेरिका ने व्यापार समझौता के जरिए भारत को रूस से तेल नहीं लेने के लिए मना लिया। ऐसे में देशवासी जानना चाहते हैं कि क्या अमेरिका ने हमारे प्रधानमंत्री को गुमराह किया या फिर खुद प्रधानमंत्री अमेरिका को खुश रखने के लिए भारत के हितों से समझौता किया?उन्होंने कहा कि आज एक भारतीय होने के नाते मन में कुछ बेहद गंभीर सवाल उठ रहे हैं। ठीक एक महीने पहले श्री मोदी अमेरिका के साथ एक ट्रेड डील करते हैं। उस डील में अमेरिका की एक अहम शर्त मान ली जाती है कि भारत रूस से तेल आयात नहीं करेगा। हम रोज़ाना इस्तेमाल होने वाले तेल का बड़ा हिस्सा विदेशों से खरीदते हैं इसलिए किसी एक या दो स्रोत को बंद कर देना सिर्फ़ एक कूटनीतिक फैसला नहीं होता। यह सीधे इस बात से जुड़ा होता है कि देश में तेल की आपूर्ती स्थिर रहेगी या नहीं, कीमतें नियंत्रित रहेंगी या नहीं और संकट के समय देश के पास विकल्प बचेंगे या नहीं। इसी को ऊर्जा सुरक्षा कहा जाता है।

आप नेता ने कहा कि इस फैसले के सिर्फ़ 20 दिन बाद अमेरिका और ईरान के बीच युद्ध शुरू हो जाता है। खुद अमेरिका की सरकार कह रही है कि इस युद्ध की तैयारी कई महीनों से चल रही थी। मतलब उन्हें पहले से पता था कि युद्ध होने वाला है। उन्हें यह भी पता था कि इससे तेल की आपूर्ति प्रभावित हो सकती है। इसके बावजूद भारत से रूस का तेल छोड़ने का फैसला करवा लिया गया।

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