मुंबई , मार्च 04 -- शिवसेना (ठाकरे गुट) के वरिष्ठ नेता एवं सांसद संजय राउत ने मंगलवार को अमेरिका, इज़रायल और ईरान के बीच चल रहे संघर्ष के पीछे के मकसद पर सवाल उठाया और कहा कि इसके पीछे बड़े राजनीतिक फायदे हो सकते हैं।

श्री राउत ने पत्रकारों से बात करते हुए हैरानी जताई कि क्या इस झगड़े का मकसद 'एपस्टीन फाइल्स' से दुनिया का ध्यान हटाना था। उन्होंने पूछा, "क्या यह झगड़ा कुछ राष्ट्रीय नेताओं ने एपस्टीन फाइल्स से ध्यान हटाने के लिए करवाया है, क्या इसमें भारतीय नेताओं के नाम शामिल हैं, क्या उन्होंने इज़रायल-अमेरिका-ईरान युद्ध भड़काया।''उन्होंने ईरान के सर्वोच्च नेता अली खामेनेई की मौत की खबरों का ज़िक्र करते हुए राजनयिक प्रोटोकॉल की कमी के लिए भी केंद्र की आलोचना की। उन्होंने कहा, " क्या ईरान में बड़ी घटना के बाद सही या आधिकारिक संवाद किया गया था।"श्री राउत ने केन्द्र सरकार पर तंज कसते हुए कहा, " जब पाकिस्तान में घटनाएं होती हैं, तो संवेदनाएं जताई जाती हैं। अब क्यों नहीं।"उन्होंने कांग्रेस से युद्ध पर अपना पक्ष साफ करने की अपील की। उन्होंने कहा, " कांग्रेस एक मुख्य विपक्षी पार्टी है। उसे अपना पक्ष साफ करना चाहिए। क्या नेहरू की विदेश नीति खत्म हो गयी है , दुख क्यों नहीं जताया गया।"शिवसेना नेता ने लंबे समय तक चलने वाले संघर्ष का अनुमान लगाते हुए कहा कि अमेरिका को पहले भी अफगानिस्तान से हटने के लिए मजबूर होना पड़ा था और कहा कि उसने फिर से गलत अंदाज़ा लगाया होगा। उन्होंने कहा कि स्पेन और ब्रिटेन जैसे देशों ने कथित तौर पर युद्ध में हिस्सा लेने से मना कर दिया है।

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