अंकारा , जुलाई 09 -- अमेरिका के विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने अंकारा में नाटो शिखर सम्मेलन के दौरान जापान के विदेश मंत्री तोशिमित्सु मोतेगी और दक्षिण कोरिया के विदेश मंत्री चो ह्यून के साथ त्रिपक्षीय बैठक की।
इस बैठक में हिंद-प्रशांत क्षेत्र में सुरक्षा, आर्थिक मजबूती और स्थिरता के लिए तीनों देशों के बीच गहरे सहयोग की पुनः पुष्टि की गयी। तीनों मंत्रियों ने इस बात पर बल दिया कि अमेरिका, जापान और दक्षिण कोरिया के बीच मज़बूत सहयोग से साझा आर्थिक समृद्धि में योगदान तथा खुले हिंद-प्रशांत क्षेत्र में सुरक्षा एवं स्थिरता को बढ़ावा मिलेगा।
तीनों नेताओं ने हिंद-प्रशांत सहयोगियों के साथ माटो के सहयोग के महत्व पर बल दिया। इसमें रक्षा खर्च एवं उत्पादन, ऊर्जा सुरक्षा, साइबर और हाइब्रिड खतरों का मुकाबला करने और यूरो-अटलांटिक व हिंद-प्रशांत दोनों क्षेत्रों में सुरक्षा चुनौतियों पर जानकारी साझा करने जैसे क्षेत्र शामिल हैं।
बैठक के दौरान, श्री रुबियो, श्री मोटेगी और श्री चो ने नागरिक परमाणु ऊर्जा पर सहयोग के लिए एक त्रिपक्षीय समझौते पर हस्ताक्षर किये। इसका उद्देश्य तीसरे देशों में छोटे मॉड्यूलर रिएक्टरों के इस्तेमाल को तेज़ी से बढ़ाना और अमेरिका से ऊर्जा आयात में विविधता लाने में मदद करना है।
मंत्रियों ने क्षेत्रीय सुरक्षा, वैश्विक सहभागिता, आर्थिक सुरक्षा तथा महत्वपूर्ण एवं उभरती प्रौद्योगिकियों पर त्रिपक्षीय सहयोग में हुई प्रगति का भी स्वागत किया। उन्होंने आर्थिक दबाव का विरोध किया और आपूर्ति शृंखलाओं का उपयोग राजनीतिक उपकरणों के रूप में करने का विरोध किया, साथ ही महत्वपूर्ण आपूर्ति शृंखलाओं में विविधता लाने एवं उन्हें सुदृढ़ बनाने की अपनी प्रतिबद्धता की पुनः पुष्टि की। तीनों देशों ने नौवहन की स्वतंत्रता बनाये रखने के लिए निरंतर सहयोग का संकल्प लिया और परामर्श के नये क्षेत्रों का स्वागत किया जिनमें अंतरराष्ट्रीय आपदा राहत प्रयास भी शामिल हैं।
तीनों देशों के विदेश मंत्रियों ने उत्तर कोरिया के पूर्ण परमाणु निरस्त्रीकरण के प्रति अपनी साझा प्रतिबद्धता व्यक्त किया और प्योंगयांग की दुर्भावनापूर्ण साइबर गतिविधियों तथा अवैध सूचना प्रौद्योगिकियों के संचालन के विरुद्ध सहयोग को मजबूत करने पर सहमति व्यक्त की। उन्होंने अपहृत लोगों, हिरासत में रखे गए लोगों, युद्धबंदियों तथा बिछड़े हुए परिवारों से संबंधित मुद्दों का समाधान करने प्रति भी अपनी प्रतिबद्धता को दोहराया।
ताइवान के मुद्दे पर तीनों पक्षों ने ताइवान जलडमरूमध्य में शांति एवं स्थिरता कायम रखने के महत्व पर बल दिया और द्वीप के आसपास लगातार अस्थिरता पैदा करने वाली कार्रवाइयों पर चिंता व्यक्त की। उन्होंने जलडमरूमध्य के दोनों ओर के बीच के मुद्दों का शांतिपूर्ण समाधान करने का आह्वान किया और बल या दबाव के माध्यम से यथास्थिति को एकतरफा बदलने के प्रयासों का विरोध किया।
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