सुलतानपुर , अक्टूबर 26 -- उत्तर प्रदेश में सुलतानपुर जिले की एक विशेष सांसद/विधायक अदालत सोमवार को लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी को मानहानि के एक मामले में दोष मुक्त करार देते हुये बरी कर दिया।
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के खिलाफ आपत्तिजनक टिप्पणी के एक मामले में विशेष अदालत ने आज श्री गांधी को दोष मुक्त करार देते हुये बरी कर दिया। फैसला सुनाते समय श्री गांधी निजी रुप से अदालत में मौजूद थे। वह आज सुबह दिल्ली से लखनऊ हवाई जहाज से पहुंचे थे जहां से उनका काफिला पूर्वांचल एक्सप्रेस वे से दिलवानी न्यायालय सुलतानपुर पहुंचा। उनके आगमन के मद्देनजर पुलिस दीवानी न्यायालय व आसपास सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किये गये थे।
ज्ञातव्य है कि 2018 में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के तत्कालीन अध्यक्ष और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के खिलाफ राहुल गांधी ने आपत्तिजनक टिप्पणी की थी, जिसे लेकर भाजपा नेता विजय मिश्र ने मुकदमा दर्ज कराया था। शिकायतकर्ता के अधिवक्ता संतोष कुमार पांडेय ने बताया कि 13 अक्टूबर को विशेष सांसद-विधायक अदालत के न्यायाधीश शुभम वर्मा ने इस मामले में फैसला सुनाने के लिए 26 अक्टूबर की तारीख तय की थी।
भाजपा नेता और जिला सहकारी बैंक के पूर्व अध्यक्ष विजय मिश्रा ने चार अगस्त 2018 को राहुल गांधी के खिलाफ मानहानि की शिकायत दर्ज कराई थी। आरोप है कि गांधी ने उसी वर्ष बेंगलुरु में एक चुनावी सभा के दौरान अमित शाह के खिलाफ हत्यारा जैसी आपत्तिजनक टिप्पणी की थी। इसके पहले अदालत ने 27 नवंबर 2023 को राहुल गांधी को मुकदमे को सामना करने के लिए तलब किया था। इसके बाद वह अदालत में पेश हुए थे, जहां उन्हें जमानत मिल गई थी।
उल्लेखनीय है कि कोतवाली देहात थाना अंतर्गत हनुमानगंज निवासी भाजपा नेता विजय मिश्रा ने आठ वर्ष पूर्व 4 अगस्त 2018 को परिवाद दर्ज कराया था। पांच साल तक चली लंबी प्रक्रिया के बाद 27 नवंबर 2023 राहुल गांधी को कोर्ट ने जरिए वारंट तलब किया था। तब 20 फ़रवरी 2024 को राहुल गांधी कोर्ट में पेश हुए। यहां 25-25 हजार के दो मुचलके पर कोर्ट ने उन्हें जमानत दिया। फिर इसी वर्ष 26 जुलाई 2024 को राहुल दोबारा कोर्ट में पेश हुए और अपना बयान दर्ज कराया।
इस बीच तीसरी बार 20 फ़रवरी 2026 को राहुल तीसरी बार कोर्ट पहुंचे और सीआरपीसी की धारा 313 के तहत बयान दर्ज कराया। विजय मिश्रा के अधिवक्ता संतोष पांडेय ने राहुल गांधी के बयान के वायस सैम्पल की लैब से जांच की मांग करते हुए 12 मार्च 2026 को अर्जी कोर्ट में दाखिल की, जिसे 2 मई को एमपी/एमएलए कोर्ट ने खारिज कर दिया। 21 मई को मजिस्ट्रेट कोर्ट से खारिज इस अर्जी के खिलाफ सेशन कोर्ट में निगरानी अर्जी दाखिल की गई जिसे 15 जुलाई को कोर्ट ने खारिज किया।
बीते 10 सितंबर को वायस सैम्पल मिलान कराने की अर्जी जिला न्यायालय से खारिज होने के खिलाफ दायर निगरानी अर्जी हाईकोर्ट के न्यायमूर्ति सुभाष विद्यार्थी ने खारिज की। इसके बाद 6 अक्टूबर 2026 दायर परिवाद पर बहस शुरू हुई जो 12 अक्टूबर 2026 को पूरी हुई। जिस पर कोर्ट ने दोनों पक्ष को सुनने के बाद 26 अक्टूबर फैसले की तिथि नियत की थी।
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