, April 17 -- श्री शाह ने कहा कि देश की आधी आबादी को अगर 33 प्रतिशत आरक्षण देना है तो वह काम अभी होना चाहिए। उन्होंने कहा कि 70 के दशक में आखिरी परिसीमन में लोकसभा की जो सीटें तय हुई थीं वह आज तक बनी हुई है। उस समय करीब 55 करोड़ आबादी थी जो आज 140 करोड़ हो गई है।

उन्होंने कहा कि यदि वर्तमान सीटों के अंतर्गत ही महिलाओं के लिए 33 प्रतिशत आरक्षण लागू किया जाए तो हर राज्य में बाकी वर्गों के लिए सीटों की उपलब्ध संख्या कम होगी लेकिन नये विधेयकों में हर राज्य में सीटों को 50 प्रतिशत वृद्धि की जा रही है और इससे महिला आरक्षण लागू होने से इस तरह की विसंगति उत्पन्न नहीं होगी।

गृहमंत्री ने जनगणना को लेकर कहा कि 2021 में कोरोना के कारण यह काम नहीं किया जा सका है। उनका कहना था कि विपक्ष जाति जनगणना नहीं चाहते हैं बल्कि वे इसके बहाने उलझाना चाहते हैं। उन्होंने कहा कि देश कि वह 140 करोडृ की आबादी को स्पष्ट करना चाहते हैं कि मोदी मंत्रिमंडल ने 2026 की जनगणना जाति के आधार पर कराने का स्पष्ट निर्णय लिया है और इसको लेकर किसी को भ्रांति नहीं होनी चाहिए। उनका कहना था कि जाति जनगणना को लेकर सरकार ने इसकी समय सारणी जारी कर दी है और यह कहना भ्रम फैलाना है कि जाति गणना टालने के लिए संविधान संशोधन का प्रस्ताव लाया गया है।

उन्होंने इस बहस में उत्तर दक्षिण का भेद करने के विपक्ष के प्रयास की कड़ी आलोचना करते हुए कहा कि यहां बैठा हर सदस्य संविधान की शपथ लेकर पूरे देश के हित के लिए काम करने को आता है। उन्होंने विपक्ष के हंगामे के बीच कहा कि देश का विभाजन कर कोई सत्ता में नहीं आ सकता है। उन्होंने कहा कि चर्चा के दौरान यह भ्रम फैलाने का प्रयास किया गया कि इस विधेयक से दक्षिण के राज्यों का प्रतिनिधित्व कम हो जाएगा जो निराधार है क्योंकि विधेयक के लागू होने पर हर राज्य में 50 प्रतिशत सीटों में वृद्धि होने जा रही है। उन्होंने कांग्रेस के के सी वेणुगोपाल से पूछा कि क्या वह अब उनकी पार्टी अब विधेयक का समर्थन करने के लिए तैयार है।

श्री शाह ने कहा कि सरकार विधेयक में सरकारी संशोधन लाने को तैयार है कि हर राज्य की सीटों में 50 प्रतिशत की वृद्धि होगी लेकिन सरकार यह मानने को तैयार नहीं है कि परिसीमन के लिए 2026 की गणना का इंतजार किया जाए। उन्होंने विपक्ष को कहा कि अगर उसने इन विधेयकों का विरोध किया तो मातृ शक्ति के आक्रोश का उन्हें सामना करना पड़ेगा।

श्री शाह ने कहा कि धर्म के आधार पर आरक्षण का संविधान में कोई प्रावधान नहीं है और इंडिया गठबंधन के लोगों ने तुष्टिकरण की राजनीति के लिए निराधार मुद्दा बना रखा है।

कांग्रेस पर हमला करते हुए उन्होंने कहा कि 1957 में काका साहेब कालेलकर समिति का ओबीसी को आरक्षण देने का सुझाव आया लेकिन उसे ठंडे बस्ते में डाल दिया। इंदिरा गांधी के समय मंडल आयोग की रिपोर्ट आई थी लेकिन इंदिरा गांधी ने इसे ठंडे बस्ते में डाल दिया था और जब वीपी सिंह सरकार ने मंडल आयोग की सिफारिशों को लागू किया तो उस समय विपक्ष के नेता राजीव गांधी ने अपने जीवन का सबसे लंबा भाषण ओबीसी आरक्षण के विरोध में दिया था।

उन्होंने यह भी कहा कि कांग्रेस ने 1951 और 1971 में जातीय जनगणना का विरोध किया था। उन्होंने कहा कि जब ओबीसी श्रेणी का एक व्यक्ति प्रधानमंत्री बना और कांग्रेस को पता लगा कि ओबीसी के बिना उसका सत्ता में आना कठिन है तो उसने यह मुद्दा पकड़ा क्योंकि उनके लिए चुनाव सर्वोपरि है जबकि भाजपा के लिए देश सर्वोपरि है।

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