गोरखपुर , अक्टूबर 22 -- भारत की स्वतंत्रता के लिए अपना सर्वस्व न्योछावर करने वाले अमर बलिदानी अशफ़ाक़ उल्ला ख़ाँ की 126वीं जयंती के अवसर पर शहीद अशफ़ाक़ उल्ला ख़ाँ प्राणी उद्यान, गोरखपुर में 126 दीप प्रज्वलित कर उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की गई।

लोगों ने अशफ़ाक़ उल्ला ख़ाँ को दीपों की ज्योति के माध्यम से महान क्रांतिकारी के अदम्य साहस, राष्ट्रप्रेम, त्याग और बलिदान का स्मरण करते हुए उनके आदर्शों को आत्मसात करने का संकल्प लिया गया।

इस अवसर पर भारतीय जनता पार्टी गोरखपुर क्षेत्र के क्षेत्रीय मंत्री एवं काकोरी बलिदान शताब्दी वर्ष स्मृति महोत्सव आयोजन समिति के संयोजक बृजेश राम त्रिपाठी ने अमर बलिदानी अशफ़ाक़ उल्ला ख़ाँ को श्रद्धासुमन अर्पित करते हुए कहा कि अशफ़ाक़ उल्ला ख़ाँ और पंडित राम प्रसाद बिस्मिल की मित्रता हमें सिखाती है कि राष्ट्र से बढ़कर कुछ भी नहीं है। राष्ट्र की स्वतंत्रता, सम्मान और अखंडता के लिए किस प्रकार अपने व्यक्तिगत हितों से ऊपर उठकर जीवन समर्पित किया जाता है, इसका अनुपम उदाहरण इन दोनों क्रांतिकारियों का जीवन है।

मुख्य अतिथि प्राणी उद्यान के निदेशक सूरज ने कहा कि अशफ़ाक़-बिस्मिल की मित्रता भारतीय इतिहास का ऐसा स्वर्णिम अध्याय है, जो पीढ़ियों तक राष्ट्रभक्ति, सामाजिक समरसता और हिंदू-मुस्लिम एकता का संदेश देता रहेगा। दोनों क्रांतिकारियों की विचारधारा, देश के प्रति समर्पण और मातृभूमि की स्वतंत्रता के लिए सर्वाेच्च बलिदान आज भी प्रत्येक भारतीय के हृदय में राष्ट्रप्रेम की भावना जागृत करता है। उन्होंने कहा कि उनका बलिदान भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के इतिहास में सदैव अमर रहेगा। उन्होंने अपने जीवन और बलिदान से यह संदेश दिया कि स्वतंत्रता, स्वाभिमान और राष्ट्र की गरिमा के लिए संघर्ष करने वाले वीरों के विचार कभी समाप्त नहीं होते।

प्राणी उद्यान के उप निदेशक डॉ योगेश प्रताप सिंह ने कहा कि अशफ़ाक़ उल्ला ख़ाँ क्रांतिकारी आंदोलन के प्रमुख स्तंभ थे।

अमर बलिदानी अशफ़ाक़ उल्ला ख़ाँ का जन्म 22 अक्टूबर 1900 को उत्तर प्रदेश के शाहजहाँपुर में हुआ था। बचपन से ही उनके मन में देश के प्रति प्रेम, अन्याय के विरुद्ध संघर्ष और स्वतंत्रता प्राप्त करने की प्रबल आकांक्षा थी। अंग्रेजी हुकूमत की दमनकारी नीतियों के विरुद्ध उन्होंने क्रांतिकारी आंदोलन का मार्ग चुना और देश को विदेशी शासन से मुक्त कराने के संकल्प के साथ अपना जीवन राष्ट्र के चरणों में समर्पित कर दिया।

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