अमरोहा , मई 11 -- उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा मान्यता प्राप्त पत्रकारों एवं उनके परिजनों के लिए घोषित कैशलेस इलाज की महत्वाकांक्षी योजना विभागीय उदासीनता और नोडल एजेंसी की हीलाहवाली के चलते अमरोहा जिले में दम तोड़ती नजर आ रही है।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की मंशा के अनुरूप पत्रकारों को स्वास्थ्य सुरक्षा कवच प्रदान करने के लिए प्रत्येक जिले से सूचना निदेशालय को डेटा भेजा गया था, लेकिन इसके लिए जिम्मेदार एजेंसी 'साचीज' की कथित मनमानी पिछले एक साल से जारी है, जिससे गंभीर बीमारियों से जूझ रहे वरिष्ठ पत्रकारों में भारी रोष व्याप्त है।
जिला सूचना कार्यालय के माध्यम से निदेशालय को बार-बार डेटा प्रेषित किए जाने के दावों के बावजूद धरातल पर आयुष्मान कार्ड न बनना तंत्र की संवेदनहीनता को उजागर करता है।
अपर जिला सूचना अधिकारी दानिश अली के अनुसार, अमरोहा जनपद से मान्यता प्राप्त पत्रकारों का डेटा कई बार रिमाइंडर के साथ निदेशालय भेजा जा चुका है और मई माह में भी इसे पुनः अपडेट कर प्रेषित किया गया है। विडंबना यह है कि एक ओर सरकारी कार्यालय डेटा भेजने की बार-बार पुष्टि भी कर रहे हैं, वहीं दूसरी ओर नोडल एजेंसी 'साचीज' के जिम्मेदार अधिकारी डेटा प्राप्त होने से स्पष्ट इंकार कर मामले को डेटा करेक्शन की आड़ में लटकाए हुए हैं। इस प्रशासनिक रस्साकशी का खामियाजा उन पत्रकारों को भुगतना पड़ रहा है जिन्हें इलाज की तत्काल आवश्यकता है।
वर्तमान में कई वरिष्ठ पत्रकार गंभीर बीमारियों की चपेट में हैं और समुचित इलाज के अभाव में जीवन-मृत्यु के बीच संघर्ष कर रहे हैं। पत्रकारों ने मुख्यमंत्री से गुहार लगाई है कि इस मामले का संज्ञान लेते हुए दोषी एजेंसी के खिलाफ कार्रवाई की जाए और अविलंब आयुष्मान कार्ड जारी कराए जाएं ताकि भविष्य में किसी अन्य पत्रकार को इलाज के अभाव में असमय काल का ग्रास न बनना पड़े।
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