अमरोहा , अगस्त 30 -- उत्तर प्रदेश के अमरोहा में इंजीनियरिंग कॉलेज के शिक्षक की नाबालिग बेटी से सामूहिक दुष्कर्म के मामले में शनिवार को न्यायालय ने तीन दोषियों को उम्रकैद और बाल अपचारी को 20 साल के कारावास की सजा सुनाई है।
दोषसिद्ध चारों पर 70 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया गया है। जमानत पर चल रहे तीन दोषियों को जेल भेज दिया गया, जबकि बाल अपचारी को बाल सुधार गृह भेजा गया।
अभियोजन अधिकारी ने रविवार को बताया कि घटना 29 अगस्त 2020 की है। दूसरे राज्य के एक जिले के इंजीनियरिंग कॉलेज में तैनात शिक्षक कोविड माहामारी के दौरान संक्रमण से सुरक्षित रहने की मंशा से परिवार सहित गांव में आ गए थे। लेकिन होनी को कुछ और ही मंजूर था कि घटना के दिन दोपहर करीब 12 बजे उनकी नाबालिग बेटी दादी की समाधि पर गई थी। आरोप है कि इस दौरान भूरा उर्फ अजीम, शेरू, कपिल और एक बाल अपचारी उसे जबरदस्ती खींचकर गन्ने के खेत में ले गए और उसके साथ सामूहिक दुष्कर्म किया। शिक्षक की तहरीर पर डिडौली कोतवाली में आरोपियों के खिलाफ सामूहिक दुष्कर्म और पॉक्सो एक्ट में प्राथमिकी दर्ज हुई। विवेचना में गौरव का नाम भी सामने आया। पुलिस ने भूरा, कपिल और गौरव को गिरफ्तार कर जेल भेजा, जबकि बाल अपचारी को बाल सुधार गृह भेजा गया।शातिर शेरू घटना के बाद से फरार हो गया था, जिसके बाद पुलिस ने उसके खिलाफ फरारी में आरोप पत्र न्यायालय में दाखिल किया और न्यायालय ने उसके खिलाफ स्थायी वारंट जारी किया था। बाद में सभी के खिलाफ आरोप पत्र न्यायालय में दाखिल किया गया।
मामले की सुनवाई अपर सत्र न्यायाधीश विशेष पॉक्सो एक्ट प्रथम की अदालत में हुई। अभियोजन की ओर से विशेष लोक अभियोजक नवीन कुमार त्यागी ने पैरवी की। शनिवार को अदालत ने कपिल, भूरा उर्फ अजीम, गौरव और बाल अपचारी को दोषी करार देते हुए सजा सुनाई। कपिल, भूरा उर्फ अजीम और गौरव को उम्रकैद तथा बाल अपचारी को 20 साल का कारावास दिया गया।
विशेष लोक अभियोजक नवीन कुमार त्यागी ने बताया कि घटना के समय कोरोना लॉकडाउन था, इसलिए कोई प्रत्यक्षदर्शी सामने नहीं आया। ऐसे में मुकदमे में पीड़िता की गवाही अहम रही। उसने शुरुआत में पांच आरोपियों के नाम बताए थे और अदालत में दर्ज बयानों में भी वह अंत तक अपने बयान पर कायम रही। मामले में पुलिस ने आठ गवाहों और 60 पेज की चार्जशीट के साथ मजबूत पैरवी की, जो दोषियों को सजा दिलाने में अहम साबित हुई।
फैसले के बाद शिक्षक पिता ने भावुक होकर कहा कि न्याय मिलने में भले ही समय लगा, लेकिन आखिरकार उनकी बेटी को इंसाफ मिल गया। अदालत के फैसले से उनके परिवार को बड़ी राहत मिली है।
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