अमरोहा , जुलाई 15 -- उत्तर प्रदेश के अमरोहा जिले में ग्रामीण रोजगार गारंटी कार्यक्रम के तहत तीन वर्षों से निष्क्रिय पड़े करीब 26 हजार मनरेगा जॉब कार्ड निरस्त किए जाएंगे। अधिकारियों के अनुसार यह कार्रवाई ग्रामीण रोजगार योजना में किए जा रहे प्रशासनिक बदलावों के तहत की जा रही है, जिसके बाद पात्र नए श्रमिकों के जॉब कार्ड बनाए जाएंगे।
आधिकारिक सूत्रों ने बुधवार को बताया कि भारत गारंटी फॉर रोजगार एंड आजीविका मिशन ग्रामीण (वीबीजीरामजी) योजना लागू होने के साथ ही जिले में मनरेगा जॉब कार्डों के सत्यापन और अद्यतन की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। इसके तहत पिछले तीन वर्षों से कार्य नहीं करने वाले करीब 26 हजार श्रमिकों को निष्क्रिय श्रेणी में चिह्नित कर उनके जॉब कार्ड निरस्त किए जा रहे हैं।
सूत्रों के अनुसार जिले में वर्तमान में लगभग 1.62 लाख सक्रिय जॉब कार्डधारक हैं। इनके जॉब कार्डों पर भी नई व्यवस्था के तहत मनरेगा के स्थान पर नई योजना का नाम दर्ज किया जाएगा।
मुख्य विकास अधिकारी अश्वनी कुमार मिश्र ने बताया कि इस संबंध में संबंधित अधिकारियों और पंचायत सचिवों को आवश्यक दिशा-निर्देश जारी कर दिए गए हैं। उन्होंने बताया कि नई व्यवस्था के तहत रोजगार के अधिकतम दिनों की संख्या 100 से बढ़ाकर 125 कर दी गई है तथा मजदूरी भुगतान की समय-सीमा 15 दिन से घटाकर सात दिन कर दी गई है।
इस बीच योजना में किए जा रहे बदलावों को लेकर विभिन्न राजनीतिक दलों और सामाजिक संगठनों ने अपनी-अपनी प्रतिक्रियाएं भी दी हैं। कांग्रेस नेता सुधीर त्यागी ने आरोप लगाया कि नई व्यवस्था से रोजगार की कानूनी गारंटी कमजोर होगी तथा राज्यों पर वित्तीय बोझ बढ़ेगा। उनका दावा है कि इससे ग्रामीण श्रमिकों के हित प्रभावित हो सकते हैं। इस संबंध में सरकार की ओर से ऐसी आशंकाओं पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया उपलब्ध नहीं हो सकी है। प्रशासन का कहना है कि जॉब कार्डों के सत्यापन और अद्यतन की प्रक्रिया निर्धारित दिशा-निर्देशों के अनुसार जारी है।
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