अमरोहा , जुलाई 17 -- उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के 18 जुलाई को प्रस्तावित अमरोहा दौरे को लेकर प्रशासनिक तैयारियां पूरी कर ली गई हैं। एक ओर करोड़ों रुपये की विकास परियोजनाओं के लोकार्पण और शिलान्यास को लेकर उत्साह का माहौल है, वहीं दूसरी ओर जिले के किसान, युवा और आम नागरिक वर्षों से लंबित बुनियादी मांगों और अधूरे वादों के पूरा होने की उम्मीद लगाए हुए हैं।

प्रदेश में एक्सप्रेसवे, औद्योगिक कॉरिडोर और डिजिटल अर्थव्यवस्था के विस्तार के बीच अमरोहा जैसे कृषि प्रधान जिले के सामने आज भी कई मूलभूत समस्याएं बरकरार हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि विकास की बड़ी योजनाओं के साथ-साथ उन मुद्दों पर भी ठोस निर्णय की आवश्यकता है, जिनका सीधा संबंध जिले की अर्थव्यवस्था और जनजीवन से है।

जिले के किसानों की प्रमुख मांग अमरोहा स्थित कुन्दन सहकारी चीनी मिल के पुनः संचालन की है। पूर्ववर्ती सरकार के दौरान यह मिल निजी क्षेत्र की चड्ढा ग्रुप को सौंप दी गई थी और तब से बंद पड़ी है। भाजपा ने अपने चुनावी संकल्पों में इसके पुनरुद्धार का आश्वासन दिया था, लेकिन अब तक इस दिशा में ठोस प्रगति नहीं हो सकी है। किसानों की मांग है कि मिल को फिर से चालू कर गन्ना उत्पादकों को राहत दी जाए।

इसके अलावा डेयरी बोर्ड, गन्ना विकास संस्थान, सरकारी कोल्ड स्टोरेज, आलू भंडारण एवं प्रसंस्करण केंद्र तथा सरकारी अतिथि गृह की स्थापना की मांग भी लंबे समय से लंबित है। अमरोहा जिला सहकारी बैंक की स्थापना न होने से लघु एवं सीमांत किसानों तथा मनरेगा श्रमिकों को सहकारी बैंकिंग सुविधाओं का पर्याप्त लाभ नहीं मिल पा रहा है।

स्वास्थ्य क्षेत्र में भी जिले की स्थिति चिंता का विषय बनी हुई है। लंबे समय से ट्रामा सेंटर और राजकीय मेडिकल कॉलेज की मांग पूरी नहीं हो सकी है। परिणामस्वरूप राष्ट्रीय राजमार्ग-09 और राज्य राजमार्ग-51 पर होने वाली दुर्घटनाओं में गंभीर रूप से घायल मरीजों को तत्काल हायर सेंटर रेफर करना पड़ता है, जिससे कई बार उपचार में देरी के कारण जान का भी नुकसान हो जाता है।

शिक्षा के क्षेत्र में भी अमरोहा अपेक्षित सुविधाओं से वंचित है। जिले में कृषि महाविद्यालय की स्थापना तथा प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करने वाले विद्यार्थियों के लिए जिला मुख्यालय पर छात्रावास की व्यवस्था अब तक नहीं हो सकी है। पर्यटन विकास के क्षेत्र में भी स्थानीय लोग तिगरी धाम और बृजघाट को आधुनिक सुविधाओं के साथ विकसित किए जाने तथा गंगा नदी पर नए पुल के निर्माण की मांग उठा रहे हैं। उनका मानना है कि इससे धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा और क्षेत्रीय अर्थव्यवस्था को नई गति मिलेगी।

परिवहन सुविधाओं को लेकर भी लोगों की अपेक्षाएं बनी हुई हैं। हरियाणा रोडवेज की तर्ज पर मजबूत सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था, गजरौला के अल्लीपुर चौपला पर आधुनिक पूछताछ केंद्र, भव्य रोडवेज डिपो और वर्कशॉप की स्थापना की मांग लंबे समय से की जा रही है।

औद्योगिक क्षेत्र गजरौला में भी अधिकांश प्रमुख इकाइयों के बंद होने अथवा उत्पादन घटने से रोजगार के अवसर सीमित हुए हैं। स्थानीय उद्यमियों का कहना है कि नए निवेश आकर्षित करने के लिए लालफीताशाही समाप्त कर प्रभावी सिंगल विंडो व्यवस्था लागू की जाए तथा कर व्यवस्था को अधिक निवेश-अनुकूल बनाया जाए, जिससे उद्योगों का विस्तार हो और युवाओं का पलायन रुक सके।

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के प्रस्तावित दौरे से जिले को नई विकास परियोजनाओं की सौगात मिलने की उम्मीद है। हालांकि स्थानीय लोगों की निगाहें इस बात पर भी टिकी हैं कि क्या वर्षों से लंबित इन बुनियादी मांगों और अधूरे वादों पर भी कोई ठोस घोषणा या निर्णय सामने आएगा, या फिर यह मुद्दे एक बार फिर भविष्य के भरोसे छोड़ दिए जाएंगे।

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