मुरादाबाद , जनवरी 29 -- उत्तर प्रदेश के अमरोहा जिले के चर्चित काफूरपुर जाट आरक्षण आंदोलन मामले में मुरादाबाद की विशेष अदालत ने समाजवादी पार्टी (सपा) के वर्तमान विधायक समरपाल सिंह समेत सभी जीवित आरोपियों को साक्ष्यों के अभाव में बरी कर दिया है।
मुरादाबाद की एमपी-एमएलए स्पेशल सेशन कोर्ट (अपर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट, कोर्ट संख्या-प्रथम) में न्यायाधीश मनेंद्र पाल सिंह की अदालत ने बुधवार को दोनों पक्षों की दलीलें सुनने और उपलब्ध साक्ष्यों के मूल्यांकन के बाद यह फैसला सुनाया। अदालत ने सपा विधायक समरपाल सिंह (नौगावां सादात विधानसभा क्षेत्र) सहित कुल 38 जीवित आरोपियों को निर्दोष घोषित करते हुए उनकी जमानत और बंधपत्र भी निरस्त कर दिए।
बरी किए गए आरोपियों में यशपाल मलिक (तत्कालीन जाट आरक्षण संघर्ष समिति अध्यक्ष), पूर्व सीओ उमेद सिंह, विजयपाल सिंह, डॉ. धीरेंद्र, धांदू, राहुल, भगत सिंह सहित अन्य शामिल हैं। मुकदमे की लंबी सुनवाई के दौरान 12 आरोपियों की मृत्यु हो चुकी है।
उल्लेखनीय है कि यह मामला वर्ष 2011 के जाट आरक्षण आंदोलन से जुड़ा है। मार्च 2011 में अमरोहा जिले के काफूरपुर रेलवे स्टेशन पर जाट समुदाय के लोगों ने धरना देते हुए रेलवे ट्रैक जाम कर दिया था, जिससे करीब 27 दिनों तक रेल संचालन बाधित रहा। उस समय प्रदेश में बहुजन समाज पार्टी की सरकार थी।
उच्च न्यायालय के आदेश पर 19 मार्च 2011 को अर्धसैनिक बलों, रेलवे सुरक्षा बल (आरपीएफ), पीएसी और पुलिस ने ट्रैक खाली कराया था। इससे पहले 11 मार्च 2011 को गजरौला जीआरपी थाने में तत्कालीन स्टेशन अधीक्षक सरदार सिंह की तहरीर पर मामला दर्ज किया गया था। रिपोर्ट के अनुसार, पांच मार्च 2011 को आदर्श जूनियर हाई स्कूल के मैदान में धरना शुरू हुआ था, जिसमें दो से तीन हजार लोगों के शामिल होने का आरोप लगाया गया था। प्रदर्शनकारियों पर रेलवे ट्रैक पर पशु बांधने और पथराव की धमकी देने जैसे आरोप लगे थे। इस मामले में रेलवे एक्ट सहित अन्य धाराओं में कुल 50 नामजद और सैकड़ों अज्ञात लोगों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की गई थी।
फैसले के बाद बरी हुए आरोपियों ने न्यायालय के प्रति भरोसा जताते हुए कहा कि उन्हें न्याय मिला है। लगभग 15 वर्ष पुराने इस मामले के समाप्त होने से जाट समुदाय और संबंधित लोगों में राहत की भावना देखी जा रही है।
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