अमरावती , जुलाई 24 -- महाराष्ट्र के अमरावती के कई जाने-माने कवियों, लेखकों, पत्रकारों, कलाकारों, शिक्षकों ने शिक्षा व्यवस्था में सुधार को लेकर छात्रों का समर्थन कर जंतर-मंतर पर प्रदर्शनकारियों के खिलाफ पुलिस कार्रवाई की आलोचना की।

बुद्धिजीवियों ने शुक्रवार को जारी एक संयुक्त बयान पर हस्ताक्षर कर शांतिपूर्ण ढंग से विरोध कर रहे छात्रों पर लाठी और आंसू गैस के इस्तेमाल को लोकतांत्रिक मूल्यों और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर हमला बताया।

उन्होंने शिक्षा और भविष्य से जुड़े मुद्दों पर आवाज उठाने वाले छात्रों की बात को बल प्रयोग की बजाय बातचीत के जरिए सुने जाने की बात कही। उन्होंने अपने बयान में शिक्षा प्रणाली में पारदर्शिता, जवाबदेही और सुधार की छात्रों की मांगों के प्रति एकजुटता व्यक्त की।

इसमें केंद्र से असहमति को दबाने की बजाय लोकतांत्रिक तरीकों से छात्रों की चिंताओं का समाधान करने का आग्रह किया गया। विदर्भ क्षेत्र के सैकड़ों जाने-माने कवियों, लेखकों, कलाकारों, शिक्षकों, पत्रकारों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने इस अपील पर हस्ताक्षर करते हुए नागरिकों से न्याय और निष्पक्ष शिक्षा प्रणाली के लिए छात्रों के संघर्ष में उनके साथ खड़े होने का आह्वान किया।

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