मुंबई , जनवरी 14 -- बॉलीवुड अभिनेता अभिनेता अभिषेक बैनर्जी ने बताया है कि फ्रीडम एट मिडनाइट 2 में उनका कैमियो रोल महान अभिनेता ओम पुरी को दिल से दी गई श्रद्धांजलि है। ओम पुरी जी की 1982 की फिल्म गांधी में की गई शानदार भूमिका आज भी यादगार मानी जाती है। यह फिल्म रिचर्ड एटनबरो ने निर्देशित की थी और इसमें बेन किंग्सले मुख्य भूमिका में थे।
निखिल आडवाणी के निर्देशन में बनी फ्रीडम एट मिडनाइट इस समय सोनी लिव पर स्ट्रीम हो रही है, और अभिषेक का छोटा लेकिन असरदार किरदार दर्शकों का ध्यान खींच रहा है।
अभिषेक इस सीरीज़ में ऐसे किरदार में नज़र आते हैं, जो ओम पुरी द्वारा निभाए गए किरदार की भावना को दर्शाता है। यह सिर्फ स्क्रीन टाइम तक सीमित नहीं है, बल्कि भारतीय सिनेमा की विरासत को सम्मान देने का एक प्रयास है। भले ही यह कैमियो हो, लेकिन अभिषेक के लिए इसका भावनात्मक महत्व बहुत गहरा है।
अभिषेक बैनर्जी ने अपने अनुभव के बारे में विस्तार से कहा, "फ्रीडम एट मिडनाइट 2 में यह कैमियो करना मेरे लिए रोल के साइज की बात नहीं थी, बल्कि उस भावना की बात थी, जो यह किरदार अपने साथ लाता है। ओम पुरी साहब ऐसे कलाकार हैं, जिनकी मैं हमेशा से बहुत इज़्ज़त करता आया हूं - उनके अभिनय, उनके निडर स्वभाव और हर किरदार में लाई गई गरिमा के लिए। जिस जगह पर उन्होंने कभी काम किया था, उसी भावना को निभाना मेरे लिए उनकी विरासत को चुपचाप सम्मान देने जैसा था। उनके स्तर के अभिनय तक पहुंचने के लिए मुझे अभी बहुत लंबा सफर तय करना है, लेकिन यह मेरा दिल से दिया गया सम्मान है। यह अनुभव मेरे लिए बेहद विनम्र करने वाला रहा।"अभिषेक बैनर्जी ने कहा, "यही हमारे फिल्म इंडस्ट्री की असली भावना है - हम एक-दूसरे के लिए खड़े रहते हैं, पहले किए गए काम का सम्मान करते हैं और हर बार निजी फायदे की गणना नहीं करते। कई बार कैमियो करना दिखावे के लिए नहीं, बल्कि एक बड़ी कहानी का हिस्सा बनने के लिए होता है। मुझे ऐसे रोल करना अच्छा लगता है क्योंकि ये एक तरह से एक्टर के लिए नेट प्रैक्टिस जैसे होते हैं,आप आते हैं, पूरा फोकस करते हैं, अपना काम करते हैं और चले जाते हैं, लेकिन सीख हमेशा साथ रहती है।"अभिषेक ने बताया कि ओम पुरी से जुड़े किरदार को निभाने के साथ एक बड़ी ज़िम्मेदारी भी महसूस हुई। उन्होंने कहा, "ओम पुरी साहब की जगह कोई नहीं ले सकता और मैं इसे कभी उस तरह से नहीं देखता। मेरे लिए यह किरदार ईमानदारी और संयम के साथ निभाना ज़रूरी था - वही गुण जो ओम पुरी साहब में सहज रूप से दिखते थे। भले ही यह कैमियो हो, लेकिन इससे एक भावनात्मक जुड़ाव है, और मैं उसे पूरी सच्चाई से निभाना चाहता था।"निखिल आडवाणी के निर्देशन में बनी फ्रीडम एट मिडनाइट 2 भारत के इतिहास के अहम पलों और शख्सियतों को दिखाती है। इस सीरीज़ में अभिषेक बैनर्जी का कैमियो एक शांत लेकिन गहरे असर वाला पल बनकर उभरता है, जो अलग-अलग पीढ़ियों के कलाकारों को जोड़ते हुए भारतीय सिनेमा की विरासत का जश्न मनाता है।
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