कोलकाता , अगस्त 24 -- कलकत्ता उच्च न्यायालय ने बैंक को ग्राहकों का अकाउंट बंद कर देने जैसी कार्रवाई करने से पहले अधिक सतर्कता बरतने का निर्देश दिया है और इसी के साथ ही केवाईसी विवरण अपडेट न होने के कारण फ्रीज तृणमूल कांग्रेस सांसद अभिषेक बनर्जी का बैंक खाता बहाल कर दिया गया है।

न्यायमूर्ति कृष्णा राव की अध्यक्षता वाली पीठ ने सोमवार को खाता फ्रीज किये जाने को चुनौती देने वाली श्री बनर्जी की याचिका का निपटारा कर दिया।

न्यायालय ने टिप्पणी की कि जब भी किसी खाते को फ्रीज करने की आवश्यकता हो, तो ग्राहक को इस कार्रवाई के कारण के बारे में पहले से सूचित किया जाना चाहिए। बैंक को पहले ग्राहक को सतर्क करना चाहिए कि केवाईसी विवरण अपडेट करने की आवश्यकता है और ऐसा न करने पर खाता फ्रीज किया जा सकता है।

न्यायमूर्ति राव ने बैंक अधिकारियों को भविष्य में इस आवश्यकता को ध्यान में रखने की चेतावनी दी और इस बात पर जोर दिया कि यह नियम केवल श्री बनर्जी ही नहीं, बल्कि किसी भी ग्राहक पर लागू होता है।

बैंक के अधिवक्ता ने न्यायालय को बताया कि श्री बनर्जी का खाता अस्थायी रूप से फ्रीज किया गया था और यह कार्रवाई जानबूझकर नहीं की गयी थी।

बैंक के अनुसार, यह जानकारी मिली थी कि श्री बनर्जी किसी अन्य मामले में शामिल थे, जिसके बाद नियमित प्रक्रिया के तहत खाते को अस्थायी रूप से फ्रीज कर दिया गया था। अब खाता बहाल कर दिया गया है।

यह मुद्दा श्री बनर्जी को आंखों के इलाज के लिए विदेश जाने की उच्चतम न्यायालय से अनुमति मिलने के तुरंत बाद सामने आया था। उनके अधिवक्ताओं ने उच्च न्यायालय को बताया था कि पूर्व सूचना के बिना उनका व्यक्तिगत बैंक खाता फ्रीज कर दिया गया था और दो क्रेडिट कार्ड भी ब्लॉक कर दिये गये थे।

श्री बनर्जी के अधिवक्ता ने इस कार्रवाई पर सवाल उठाते हुए ध्यान दिलाया था कि उनके केवाईसी की वैधता दिसंबर 2026 तक थी।

अधिवक्ता ने यह सवाल भी उठाया था कि बैंक ने उन्हें केवाईसी अपडेट करने की आवश्यकता के बारे में सूचित क्यों नहीं किया या प्रक्रिया को ऑनलाइन पूरा करने की अनुमति क्यों नहीं दी?उच्च न्यायालय ने इससे पहले इस मुद्दे पर बैंक से जवाब तलब किया था। इसके बाद बैंक ने न्यायालय को सूचित किया कि खाता फ्रीज होने के बाद ऑनलाइन केवाईसी पूरा नहीं किया जा सकता था। बाद में बैंक के एक प्रतिनिधि ने श्री बनर्जी के आवास पर जाकर केवाईसी प्रक्रिया पूरी की।

बैंक का स्पष्टीकरण सुनने और खाता बहाल होने की बात पर गौर करने के बाद, न्यायमूर्ति राव ने भविष्य में ऐसे मामलों में अपनायी जाने वाली प्रक्रिया के प्रति अधिकारियों को आगाह करते हुए याचिका का निपटारा कर दिया।

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