पटना , सितंबर 26 -- बिहार के शिक्षा मंत्री मिथिलेश तिवारी ने शनिवार को कहा कि बच्चों को केवल स्कूल भेज देने से अभिभावकों की जिम्मेदारी खत्म नहीं हो जाती, बल्कि सीखने की प्रक्रिया में उनकी नियमित भागीदारी जरूरी है।

श्री तिवारी ने शनिवार को दानापुर के रामजीचक स्थित राजकीय मध्य विद्यालय में 'मेरे सपनों का भारत : सेवा चित्र' राज्यव्यापी अभियान और अभिभावक-शिक्षक संगोष्ठी के बाद विद्यालय पहुंचे अभिभावकों से सीधा संवाद किया। उन्होंने एक-एक कर अभिभावकों की समस्याएं जानीं और उनके समाधान का भरोसा दिलाया।

शिक्षा मंत्री ने कहा कि अभिभावक बच्चों की पढ़ाई को केवल स्कूल की जिम्मेदारी न समझें। वे घर पर भी बच्चों के सीखने के लिए सकारात्मक माहौल बनाएं। बच्चों से उनकी पढ़ाई के बारे में नियमित बातचीत करें, उनकी समस्याओं को समझें और किसी तरह की परेशानी होने पर शिक्षकों से संवाद करें। उन्होंने कहा कि स्कूल और परिवार के बीच बेहतर तालमेल से ही बच्चों का सर्वांगीण विकास संभव है।

श्री तिवारी ने विद्यालय में लगी 'मेरे सपनों का भारत : सेवा चित्र' प्रदर्शनी का भी अवलोकन किया। उन्होंने छात्र-छात्राओं की ओर से बनाई गई विभिन्न कलाकृतियों को देखा और उनकी रचनात्मकता की सराहना की। उन्होंने बच्चों का उत्साह बढ़ाते हुए कहा कि इस तरह की गतिविधियां उनकी कल्पनाशक्ति, रचनात्मकता और आत्मविश्वास को मजबूत करती हैं।

कार्यक्रम के दौरान श्री तिवारी ने बच्चियों के साथ सामूहिक तस्वीर भी खिंचवाई। इस अवसर पर विद्यालय के शिक्षक, अभिभावक और बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं उपस्थित थे।

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