जयपुर , मई 12 -- राजस्थान में संयुक्त अभिभावक संघ ने जयपुर जिला प्रशासन द्वारा मंगलवार को कोचिंग संस्थानों के संबंध में बुलाई गई बैठक को एकतरफा और अभिभावक विरोधी करार देते हुए कहा है कि अभिभावकों को दरकिनार कर केवल कोचिंग संचालकों के साथ बैठक करना लोकतांत्रिक मूल्यों और पारदर्शिता के विपरीत है।
संयुक्त अभिभावक संघ के प्रदेश प्रवक्ता अभिषेक जैन बिट्टू ने आरोप लगाते हुए कहा कि बैठक में केवल कोचिंग संचालकों और प्रशासनिक अधिकारियों को आमंत्रित किया गया है जबकि लाखों रुपये फीस देने वाले अभिभावकों और विद्यार्थियों के प्रतिनिधियों को जानबूझकर दूर रखा गया है।
श्री बिट्टू ने कहा कि कोचिंग संस्थानों से जुड़े मुद्दे सीधे विद्यार्थियों की सुरक्षा, मानसिक स्वास्थ्य, फीस, शोषण, सुविधाओं और भविष्य से जुड़े हुए हैं। ऐसे में अभिभावकों को दरकिनार कर केवल कोचिंग संचालकों के साथ बैठक करना लोकतांत्रिक मूल्यों और पारदर्शिता के विपरीत है।
उन्होंने कहा कि उच्चतम न्यायालय तथा केंद्र सरकार द्वारा कोचिंग संस्थानों को लेकर जारी दिशा-निर्देशों में विद्यार्थियों की सुरक्षा, मानसिक दबाव की रोकथाम, अभिभावकों की भागीदारी और जवाबदेही सुनिश्चित करने पर विशेष जोर दिया गया है लेकिन जिला प्रशासन द्वारा बुलाई गई यह बैठक ना केवल दिशा-निर्देशों की भावना के विपरीत है बल्कि न्यायालय और केंद्र सरकार द्वारा जारी दिशा निर्देशों की अवहेलना भी है।
उन्होंने कहा कि जिला प्रशासन यदि वास्तव में कोचिंग संस्थानों पर प्रभावी नियंत्रण चाहता है तो उसे सबसे पहले अभिभावकों और विद्यार्थियों की बात सुननी चाहिए। केवल कोचिंग संचालकों को बुलाकर बंद कमरे में बैठक करना यह दर्शाता है कि प्रशासन विद्यार्थियों और अभिभावकों की समस्याओं की बजाय कोचिंग लॉबी को प्राथमिकता दे रहा है जो अभिभावकों का अपमान है।
उन्होंने कहा कि कोचिंग संस्थानों में लगातार बढ़ती फीस, विद्यार्थियों पर मानसिक दबाव, आत्महत्या की घटनाएं, सुरक्षा मानकों की अनदेखी और नियमों के उल्लंघन जैसे गंभीर मुद्दों पर अभिभावकों की सहभागिता के बिना कोई भी निर्णय स्वीकार्य नहीं होगा।
संयुक्त अभिभावक संघ ने मांग की है कि जिला प्रशासन बैठक में अभिभावक संगठनों, विद्यार्थी प्रतिनिधियों, मनोवैज्ञानिक विशेषज्ञों और शिक्षा क्षेत्र से जुड़े सामाजिक संगठनों को भी शामिल करे ताकि कोचिंग व्यवस्था को लेकर संतुलित और विद्यार्थियों के हित में निर्णय लिए जा सकें।
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