दरभंगा, मई 17 -- भारत की कम्युनिस्ट पार्टी मार्क्सवादी लेनिनवादी (भाकपा माले) के राष्ट्रीय महासचिव दीपांकर भट्टाचार्य ने रविवार को आरोप लगाया कि पहले मतदाता सरकार चुनते थे, लेकिन अब "सरकार चुनाव आयोग के जरिए मतदाता चुनने" की दिशा में आगे बढ़ रही है, जो लोकतंत्र के लिए गंभीर खतरा है। श्री भट्टाचार्य ने आज यहां संवाददाता सम्मलेन में चुनाव प्रक्रिया पर गंभीर सवाल उठाते हुए कहा कि चुनाव से पहले बिहार और अब बंगाल में मतदाता सूची के गहन पुनरीक्षण (एसआईआर)के जरिए लाखों लोगों के नाम मतदाता सूची से बाहर कर दिए गए हैं, उनका नाम वापस जोड़ा जाना चाहिए, लेकिन इसके उलट अब पूरे देश में एसआईआर का कार्य शुरू किया गया है।

श्री भट्टाचार्य ने कहा कि लाखों लोगों के नाम मतदाता सूची से हटाए ही जा रहे हैं, जबकि उन्हें पुनः जोड़ने के बजाय सरकारी सुविधाएं बंद करने की चेतावनी दी जा रही है। उन्होंने कहा कि करीब 45 लाख लोगों के सामने राशन कार्ड, बैंक खाता, ड्राइविंग लाइसेंस सहित अन्य मिल रही सरकारी सुविधाएं छिनने का संकट उत्पन्न हो गया है।

श्री भट्टाचार्य ने आरोप लगाया कि बिहार में "बुलडोजर राज" कायम हो चुका है, जहां गरीबों के घर तोड़े जा रहे हैं, छात्रों और नौजवानों के आंदोलनों का दमन किया जा रहा है तथा विरोध की आवाजों को दबाया जा रहा है। उन्होंने कहा कि पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार कभी सुशासन, सामाजिक न्याय और सांप्रदायिकता विरोधी राजनीति की बात करते थे, लेकिन आज बिहार पूरी तरह भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के बुल्डोज़र राज के हवाले कर दिया गया है। नया मंत्रिमंडल खासकर शिक्षा और स्वास्थ्य मंत्रालय राज्य में मजाक का विषय बन गया है।

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