अलवर , अक्टूबर 30 -- राजस्थान में अलवर जिले में गर्भवती महिलाओं की मृत्युदर को शून्य करने के उद्देश्य से जिला प्रशासन ने एक अभिनव पहल शुरू की है।

आधिकारिक सूत्रों ने शु्क्रवार को बताया कि इसके तहत उच्च जोखिम वाली गर्भावस्था (एचआरपी) वाली महिलाओं की पहचान, पंजीकरण और उनके स्वास्थ्य की लगातार निगरानी के लिए कृत्रिम बुद्धमत्ता (एआई) आधारित 'एचआरपी वेब ट्रैकर ऐप' तैयार किया जायेगा। इस तकनीक के माध्यम से गर्भवती महिलाओं को समय पर बेहतर चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध कराने और प्रसव के दौरान होने वाले जोखिमों को कम करने में मदद मिलेगी।

जिला कलक्टर डॉ. आर्तिका शुक्ला की अध्यक्षता में शुक्रवार को चिकित्सा एवं तकनीकी विशेषज्ञों की सुझावात्मक बैठक आयोजित की गयी। बैठक में डाॅ शुक्ला ने कहा कि केंद्र एवं राज्य सरकार की मंशा के अनुरूप जिले में संस्थागत प्रसव को बढ़ावा देने के साथ मातृत्व मृत्युदर को शून्य करने के लिए आधुनिक तकनीक का उपयोग किया जाएगा।

उन्होंने बताया कि प्रस्तावित एप के माध्यम से एचआरपी वाली महिलाओं के पंजीकरण से लेकर प्रसव तक प्रत्येक स्तर पर उनके स्वास्थ्य की निगरानी की जायेगी, ताकि किसी भी संभावित खतरे की समय रहते पहचान करके त्वरित चिकित्सा सहायता उपलब्ध करायी जा सके।

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