नारायणपुर , अक्टूबर 09 -- छत्तीसगढ़ के नक्सल प्रभावित रहे अबूझमाड़ क्षेत्र में भारतीय वायुसेना की प्रस्तावित फायरिंग रेंज को लेकर आदिवासी ग्रामीणों में विस्थापन की आशंका बढ़ गई है। करीब 10 हजार एकड़ भूमि पर फायरिंग रेंज स्थापित किए जाने की चर्चा के बीच स्थानीय ग्रामीणों ने इसका विरोध शुरू कर दिया है। इस संबंध में ग्रामसभा में विरोध का प्रस्ताव भी पारित किया गया है।

अबूझमाड़िया समाज के अध्यक्ष रामजी ध्रुव ने आज बताया कि वायुसेना की प्रस्तावित फायरिंग रेंज के विरोध में ग्रामसभा ने प्रस्ताव पारित किया है। ग्रामीणों को आशंका है कि परियोजना के क्रियान्वयन से उनकी जमीन, आवास और पारंपरिक आजीविका प्रभावित हो सकती है।

जानकारी के अनुसार वर्ष 2025 में वायुसेना की फायरिंग रेंज के लिए लगभग एक लाख 34 हजार एकड़ भूमि का प्रस्ताव सामने आया था। हालांकि, इतनी बड़ी भूमि की उपलब्धता और अन्य व्यावहारिक कठिनाइयों के कारण अब प्रस्तावित क्षेत्र को घटाकर करीब 10 हजार एकड़ किए जाने की चर्चा है। फिलहाल परियोजना के लिए जमीन के अंतिम चयन और संभावित प्रभावित गांवों की स्थिति स्पष्ट नहीं है।

उल्लेखनीय है कि लंबे समय तक नक्सली गतिविधियों से प्रभावित रहे अबूझमाड़ में सुरक्षा व्यवस्था में सुधार के साथ विकास कार्यों को गति देने के प्रयास किए जा रहे हैं। ऐसे समय में प्रस्तावित फायरिंग रेंज को लेकर ग्रामीणों के बीच नई चिंता उत्पन्न हो गई है। स्थानीय आदिवासी समुदाय के लिए जल, जंगल और जमीन न केवल आजीविका के साधन हैं, बल्कि उनकी सामाजिक, सांस्कृतिक और पारंपरिक पहचान से भी जुड़े हुए हैं।

ग्रामीणों को आशंका है कि फायरिंग रेंज बनने से उनकी कृषि भूमि, वन संसाधनों तक पहुंच और पारंपरिक आवागमन प्रभावित हो सकता है। संभावित विस्थापन और भूमि अधिकारों को लेकर भी स्थानीय स्तर पर सवाल उठाए जा रहे हैं।

दूसरी ओर, वायुसेना के लिए फायरिंग रेंज सैन्य प्रशिक्षण और परिचालन तैयारियों की दृष्टि से महत्वपूर्ण मानी जाती है। हालांकि, आदिवासी बहुल क्षेत्र में इस प्रकार की परियोजना के लिए भूमि चिह्नित करने की प्रक्रिया में स्थानीय समुदायों के अधिकारों, ग्रामसभा की भूमिका और लागू कानूनी प्रावधानों का पालन महत्वपूर्ण होगा।

फिलहाल प्रस्तावित फायरिंग रेंज को लेकर ग्रामसभा के विरोध के बाद प्रशासन के अगले कदम पर नजर बनी हुई है। परियोजना के वास्तविक स्वरूप, भूमि की आवश्यकता और संभावित विस्थापन को लेकर आधिकारिक स्थिति स्पष्ट होने का इंतजार है।

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