नारायणपुर , मई 08 -- छत्तीसगढ़ के दुर्गम एवं संवेदनशील अबूझमाड़ क्षेत्र में 38वीं वाहिनी भारत तिब्बत सीमा पुलिस (आईटीबीपी) ने स्थानीय ग्रामीणों के सहयोग से लगभग 60 मीटर लंबा लकड़ी और बाँस से निर्मित पुल तैयार कर विकास और जनसहयोग का उत्कृष्ट उदाहरण प्रस्तुत किया है।
38वीं वाहिनी के कमांडेंट रोशन सिंह असवाल के मार्गदर्शन तथा असिस्टेंट कमांडेंट राम कुमार मौर्य के नेतृत्व में 15 जवानों की टीम ने चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों के बीच मात्र 15 दिनों में इस पुल का निर्माण कार्य पूरा किया, जिसकी जानकारी शुक्रवार को दी गई ।
पुल का उद्घाटन गुरुवार को 38वीं वाहिनी के कमांडेंट असवाल एवं नारायणपुर के पुलिस अधीक्षक रोबिसन गुरिया ने स्थानीय ग्रामीणों और जवानों की उपस्थिति में किया।
यह पुल ओरछा थाना क्षेत्र से करीब 20 किलोमीटर दूर कुड़मेल गांव के पास बनाया गया है, जहां बरसात के दौरान नाले में तेज बहाव के कारण आवागमन पूरी तरह बाधित हो जाता था। इसके चलते ग्रामीणों का महीनों तक बाहरी दुनिया से संपर्क टूट जाता था तथा सुरक्षा बलों की परिचालन गतिविधियां भी प्रभावित होती थीं। राशन, स्वास्थ्य सेवाएं और अन्य आवश्यक सुविधाएं पहुंचाने में भारी कठिनाइयों का सामना करना पड़ता था।
आगामी मानसून को देखते हुए त्वरित स्तर पर स्थायी पुल निर्माण संभव नहीं होने के कारण 38वीं वाहिनी आईटीबीपी ने स्थानीय संसाधनों और ग्रामीणों के सहयोग से वैकल्पिक पुल निर्माण का निर्णय लिया।
स्थानीय संसाधनों से तैयार यह पुल न केवल पैदल आवागमन के लिए उपयोगी है, बल्कि मोटरसाइकिल के भार को सुरक्षित रूप से वहन करने में भी सक्षम है।
इस पुल के निर्माण से अब ग्रामीणों एवं सुरक्षा बलों को वर्षभर सुरक्षित आवागमन की सुविधा उपलब्ध हो सकेगी। यह पहल आईटीबीपी की कर्तव्यनिष्ठा, जनसेवा और स्थानीय सहभागिता का प्रेरणादायक उदाहरण मानी जा रही है।
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